दलित बालिका से दुष्कर्म मामले में अपर सत्र न्यायाधीश शंकरलाल ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 20 हजार रुपए का अर्थदंड लगाने के साथ ही पीड़िता को 50 हजार रुपए का प्रतिकर देने का भी निर्देश न्यायाधीश ने दिया है। मामला पांच वर्ष पुराना है।
राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र में तहरीर देकर एक व्यक्ति ने कहा था कि उसकी पुत्री आजमगढ़ जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के एक गांव स्थित ससुराल से परीक्षा देने के लिए आई थी। उसे 20 अप्रैल 2012 को सत्येंद्र नामक आरोपी बहला फुसलाकर भगा ले गया। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर छानबीन शुुरू की। बाद में बालिका को तलाशने के साथ आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
चिकित्सकीय परीक्षण में बालिका के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया। पुलिस ने ये धाराएं भी केस में बढ़ा दी। इस बीच यह मामला अब सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। अपर सत्र न्यायाधीश शंकरलाल ने मामले की सुनवाई करते हुए अभियुक्त सत्येंद्र को दोषी पाया।
उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के साथ ही 20 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा भुगतने का आदेश दिया गया। न्यायाधीश ने पीड़िता को 50 हजार रुपए का प्रतिकर भी दिए जाने का निर्देश भी दिया।