बसखारी। क्षेत्र के मोतिगरपुर स्थित सिधेश्वर धाम में श्रीरामकथा के तीसरे दिन मंगलवार को प्रवाचक डॉ. चंद्रांशु महाराज ने राम के चरित्र और आदर्शों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राम का चरित्र हर दृष्टि से अनुकरणीय है। राम ने जीवन के हर रिश्ते में आदर्श प्रस्तुत किया। चाहे पुत्र के रूप में हों, मित्र के रूप में हों या एक राजा के रूप में, हर भूमिका में उनका आचरण समाज के लिए मार्गदर्शक रहा है।
वर्तमान समय में समाज में बढ़ती अस्थिरता, स्वार्थ और संघर्ष की स्थितियों को दूर करने के लिए राम के चरित्र से सीख लेने की आवश्यकता है। राम का जीवन त्याग, मर्यादा और कर्तव्य का उदाहरण है। जीवन में ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने ईश्वर पर विश्वास रखता है तो जीवन की कठिनाइयों और दुखों का सामना करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। कई बार मनुष्य जीवन की समस्याओं से घिरा रहता है, लेकिन आस्था और धैर्य के साथ वह इन परिस्थितियों से बाहर निकल सकता है। महंत स्वामी कृष्णन दास, डॉ. माया राजपूत प्रदीप सिंह, कुलदीप सिंह, वीरेंद्र निषाद, राजेंद्र जायसवाल, ऋषभ जायसवाल, अमन, पीयूष उपाध्याय, राम केदार यादव, बाबू बच्चा सिंह व अन्य उपस्थित रहे।
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बाल लीलाओं का किया गया वर्णन
भीटी। क्षेत्र के सिंगरा में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन मंगलवार को प्रवाचक विनय कृष्ण ओझा ने कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। बाल लीलाओं के माध्यम से जीवन में सरलता और आनंद का संदेश मिलता है। पूतना वध का प्रसंग अन्याय और बुराई के अंत का प्रतीक है।माता-पिता के प्रेम और संस्कार से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है। गोकुल की लीलाएं समाज में सहयोग और आपसी संबंधों की भावना को दर्शाती हैं। इस दौरान मुख्य यजमान ओमप्रकाश तिवारी, महादेव तिवारी, राजेश कुमार तिवारी व अन्य उपस्थित रहे।
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पद और धन के अहंकार को त्यागना आवश्यक
आलापुर। क्षेत्र के शहाबुद्दीनपुर में श्रीमद्भागवत कथा का के पहले दिन मंगलवार को भागवत महात्म्य का वर्णन किया गया। प्रवाचक आशुतोष शुक्ला ने बताया कि आध्यात्मिक ज्ञान मनुष्य को जीवन की दिशा देता है। जीवन में अच्छे कर्म ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान बनते हैं। पद और धन के अहंकार को त्यागना आवश्यक है। समाज में संतुलन और शांति के लिए नैतिक मूल्यों का पालन जरूरी है। श्रीमद्भागवत कथा अमर कथा है। इसका श्रवण करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। कथा को केवल सुनना पर्याप्त नहीं, बल्कि जीवन में अच्छे विचारों को अपनाना भी आवश्यक है। संवाद
प्रकृति और समाज के प्रति सम्मान आवश्यक
भीटी। क्षेत्र के काही में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन प्रवाचक राज कुमार मिश्रा ने कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि पूतना वध का प्रसंग अन्याय और बुराई के अंत का प्रतीक है। माता-पिता का प्रेम और संस्कार जीवन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृष्ण की बाल लीलाएं जीवन में सरलता और प्रसन्नता का संदेश देती हैं। गोवर्धन पूजा प्रकृति और पर्यावरण के महत्व को दर्शाती है। कठिन परिस्थितियों में भी विश्वास और धैर्य बनाए रखना आवश्यक है।प्रकृति और समाज के प्रति सम्मान आवश्यक है। इस दौरान राधेश्याम शुक्ल, मंंजूलता, अनिल व अन्य उपस्थित रहे।
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मानसिक संतुलन प्रदान करती है आस्था
केदारनगर। क्षेत्र के अवसानपुर में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन मंगलवार को प्रवाचक चंद्रभूषण पांडेय ने बताया कि जीवन में अच्छे कर्म ही व्यक्ति की पहचान बनते हैं। अपने दायित्वों का पालन करना समाज के लिए आवश्यक है। आस्था मनुष्य को मानसिक संतुलन प्रदान करती है। धार्मिक कथाएं जीवन को समझने की दिशा देती हैं। सामूहिक सहयोग से ही सामाजिक और धार्मिक आयोजन सफल होते हैं। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जीवन को समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग भी दिखाती हैं।