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...चलो तिरंगा लहरा देते हैं उनके सम्मान में

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अंबेडकरनगर के सया डिग्री कॉलेज में ग्रामर्षि महोत्सव पर काव्य पाठ करते कवि। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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भीटी। ग्रामोदय आश्रम स्नातकोत्तर महाविद्यालय वीरसिंहपुर सरैया सया में एक शाम ग्रामर्षि के नाम पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से रात भर श्रोताओं का मनोरंजन किया। हास्य, व्यंग्य, ओज व श्रृगार आदि सभी विधाओं की रचनाएं पढ़ी गईं। कवि सम्मेलन का शुभारंभ महाविद्यालय प्रबंधक व पूर्व सांसद हरिओम पांडेय ने प्राचार्य डॉ. राकेशचंद्र तिवारी के साथ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
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कवि सम्मेलन में शैलेंद्र मासूम लखनवी ने पढ़ा कि जबसे ऋतुराज का आगमन हो गवा, तब से गुलजार सगरो चमन होई गवा। ओज के कवि रामभदावर ने अपनी रचनाएं पढ़ कर लोगों को राष्ट्रवाद व देशभक्ति से सराबोर कर खूब तालियां बटोरीं। पढ़ा कि मत कहो अंगार है, उदीप्त सानंद हैं हम, जिसने भुजंगो को भी साधा, वही चंदन हैं हम। आजमगढ़ से आए भालचंद्र त्रिपाठी ने पढ़ा कि काम रावन का है तो कीजै खुशी से, राम का चेहरा लगाना ठीक है क्या।
बस्ती से आए डॉॅ वेदप्रकाश द्विवेदी प्रचंड ने पढ़ा कि गौरव भूषित हो भारत मां, केवल यह आनंद चाहिए। शब्दों में हो राज वंदना, ऐसा सुरभित छंद चाहिए। राष्ट्रवाद के प्रखर कवि वाहिद अली वाहिद ने किसानों के हित में पंक्तियां पढ़ीं। कहा कि जिनके हाथ चला करते हैं खेत और खलिहान में, जिनकी पगड़ी टोपी चमके हरे धान में पान में। जो हम को रोटी देते हैं, हमको कष्ट से दान में। चलो तिरंगा लहरा देते हैं उनके सम्मान में। पुष्कर सुल्तानपुरी ने पढ़ा कि चले गर हादसों का दौर कोई गम नहीं होता। उजाड़े इश्क की महफिल किसी में दम नहीं होता।
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लखीमपुर खीरी से आयीं कवयित्री रंजना सिंह ने पढ़ा कि बहते दरिया के रुख को मोड़ने की मत सोचो, भोरी चादर है इसे ओढ़ने की मत सोचो। कली होती है जमाने में महक देने को, तुम इनसे प्यार करो तोड़ने की मत सोचो। चांदनी शबनम जलालपुरी के गीतों ने लोगों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने पढ़ा कि कितनी चाहत है मुझसे मेरे हमनशीं, तूने मुझको बताया मजा आ गया। चांदनी की ग़जल को भरी बज्म में, तूने सबको सुनाया मजा आ गया।
कवयित्री शोला टांडवी ने पढ़ा कि मस्केबाजी की जलवा गई वे कहे बन गये मंत्री, पीठ पर डिग्रियां लाद कर हम गधे के गधे रह गए। कवि शाकिब आलम आजमी ने पढ़ा कि ओठों से मेरे छीन कर मुस्कान ले गया। मेहमान बन कर आया था, और जान ले गया। प्रयागराज धाम से आयीं वंदना शुक्ला ने पढ़ा कि माता सीता के दर्द कुछ इस तरह से सुनाएं, नैनों से बेहतर नित जल था, मन के भीतर एक जंगल था, संग तेरे क्यों न चल पाई, भर न सकी क्यों दुख की खाई, थक गई देते देते परीक्षा, अब लेती हूं विश्राम, प्रभु तुम्हें अंतिम बार प्रणाम।
कवि बिहारीलाल अंबर इलाहाबादी ने अपने हास्य व्यंग्य की रचनाओं से सबको हंसी से लोटपोट कर दिया। इसके अलावा कवयित्री सुनीता पाठक, अशोक टाटंबरी, जावेद सुल्तानपुरी, रुचि द्विवेदी आदि ने भी रचनाएं पढ़ीं। पूर्व सांसद ने कवियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वाहिद अली वाहिद व संचालन विकास बौखल ने किया। इस मौके पर विधायक इंद्रप्रताप तिवारी खब्बू, डॉॅ अनुपम पांडेय, विजय उपाध्याय, डॉॅ दिनेश मिश्र, डॉॅ चंद्रप्रकाश मिश्र, डॉॅ. हरीशकुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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