इस पर डीएम ने सीएमएस को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करने का निर्देश दिया। प्रशासन की सख्ती के चलते दोपहर को दो महिला चिकित्सक अवकाश से वापस लौट आयीं।
जिला अस्पताल में तैनात चार महिला चिकित्सकों के अवकाश पर चले जाने से महिलाओं की न तो समुचित जांच हो पा रही थी, और न ही इलाज। पिछले कई दिनों से यह स्थिति बनी हुई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने महिला चिकित्सकों को तत्काल अवकाश से वापस लौटने का निर्देश दिया था।
यह भी चेतावनी दी थी कि जिस आधार पर वे चिकित्सकीय अवकाश पर हैं, उसकी मेडिकल बोर्ड से जांच कराई जाएगी। महिला चिकित्सकों के एक एक कर अवकाश पर चले जाने से महिला मरीजों के इलाज का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। सोमवार को भी अलग अलग क्षेत्रों से कई गर्भवती महिलाएं आशा बहुओं के साथ जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंची।
महिला चिकित्सक न होने के चलते उनकी जांच नहीं हो सकी, तो उनमें अस्पताल प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश फैल गया। एकजुट हुईं गर्भवती महिलाओं ने कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया, और इसके बाद डीएम विवेक से मुलाकात की। गर्भवती महिलाओं ने अस्पताल प्रशासन के रवैए की शिकायत की।
मामले को गंभीरता से लेते डीएम ने तत्काल सीएमएस को कार्यालय बुलाकर अविलंब महिला चिकित्सक की व्यवस्था कर महिलाओं की समुचित जांच कराए जाने का निर्देश दिया। अस्पताल में चार महिला चिकित्सक डा. रजनी सचान, डॉ सुषमा, डॉ जयश्री गुप्ता व डा. भानुमती की तैनाती है।
बीते दिनों एक एक कर महिला चिकित्सकों ने बीमारी का हवाला देते हुए अवकाश पर चली गईं। नतीजा यह रहा कि महिला चिकित्सक न होने का प्रतिकूल प्रभाव गर्भवती महिलाओं की जांच एवं प्रसव पर पड़ने लगा। जिलाधिकारी विवेक के हस्तक्षेप के बाद सीएमएस ने स्वयं पर्ची पर हस्ताक्षर कर महिलाओं की जांच कराया जाना सुनिश्चित किया।
इस बीच दोपहर बाद दो महिला चिकित्सक जयश्री गुप्ता व डॉ रजनी सचान छुट्टी से वापस आ गईं। सीएमएस ने बताया कि दो महिला चिकित्सक वापस आ गईं हैं। दोपहर करीब से जिला चिकित्सालय में महिलाओं के इलाज की सुचारु व्यवस्था शुरु हो गई है। दो अन्य महिला चिकित्सक भी मंगलवार से ड्यूटी पर आ जाएंगी। उनका अवकाश निरस्त कर दिया गया है।