नहर विभाग की लापरवाही का खामियाजा कभी भी पांच दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को भुगतना पड़ सकता है। दरअसल शारदा सहायक नहर के उफान पर होने एवं शिबलीपुर से जमुनीपुर के बीच में पटरी के क्षतिग्रस्त होने से कभी भी कटान हो सकती है। जमुनीपुर के निकट दो दिनों से रिसाव हो रहा है।
जानकारी के बावजूद न तो धीमी गति से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही पटरियों की मरम्मत कराई गई। ऐसे में यदि कटान होती है तो नहर के किनारे स्थित लगभग एक हजार बीघा धान की फसल प्रभावित हो सकती है। नहर विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के लापरवाहीपूर्ण रवैये सेे हजारों किसानों की नींद उड़ गई है।
गौरतलब है कि जिले से होकर बहने वाली शारदा सहायक नहर से लगभग 500 गांवों के किसान फसल की सिंचाई करते हैं। इन दिनों नहर में पानी पूरी तरह उफान पर है। कई स्थानों पर नहर की पटरी तक पानी बह रहा है। इससे लगभग पांच दर्जन गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। दरअसल शिबलीपुर से जमुनीपुर तक के बीच लगभग 15 किमी की दूरी में नहर की पटरी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
इसके अलावा जमुनीपुर व लोदीपुर के निकट नहर में दो दिनों से धीमी गति से रिसाव भी हो रहा है। क्षतिग्रस्त पटरी को ठीक कराने व रिसाव को बढ़ने से रोकने की शिकायत कई बार ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से की लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। नतीजतन पटरियों के क्षतिग्रस्त होने व धीमी गति से हो रहे रिसाव को देखते हुए कटान की आशंका प्रबल हो गई है।
इससे धान किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं हैं। उनका कहना है कि यदि शीघ्र ही इस तरफ ठोस कदम नहीं उठाया गया तो कभी भी कटान हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो पांच दर्जन गांवों की एक हजार बीघा से अधिक धान की फसल जलमग्न होने की आशंका है जिससे किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।
कटान के भय का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जमुनीपुर, रसूलपुर, उसरी, लोदीपुर, कमलापुर, महाए, सांगापुर, दहीरपुर, इस्माइलपुर, सीहमई व अरजानीपुर आदि गांवों के किसान रात में खेतों की तरफ जाकर नहर की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
लोदीपुर के रजनीश व जमुनीपुर के जोगेंद्र मिश्र ने कहा कि नहर विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा उन्हें कभी भी भुगतना पड़ सकता है। कहा कि अभी तो अत्यंत धीमा रिसाव हो रहा है।
यदि इस पर समय रहते अंकुश नहीं पाया गया तो कभी भी भारी कटान हो सकती है। शिबलीपुर के जगदीश व रामसनेही ने नाराजगी जताते हुए कहा कि या तो नहर में पानी ही नहीं छेड़ा जाता और जब डाला जाता है तो इतना भर दिया जाता है कि पटरी के ऊपर तक पानी बहने लगता है।
एडीएम रामसूरत पांडेय ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। नहर विभाग के अधिकारियों से पड़ताल कराई जाएगी। यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।