टांडा(अंबेडकरनगर)। पिछले निकाय चुनाव में रनर रहीं शबाना नाज इस बार भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने के साथ सहानुभूति की बदौलत अध्यक्ष की कुर्सी अपने नाम कर ली। खास बात यह कि अल्पसंख्यक बहुल इस सीट पर सपा, बसपा व एआईएमआईएम जैसी पार्टियों के प्रत्याशियों को पछाड़कर भाजपा ही यहां लगातार मुख्य मुकाबले में रहीं। टांडा नगर पालिका परिषद के मतों की गणना का दौर शनिवार को काफी रोचक रहा। मतदान के समय से ही निर्दल प्रत्याशी शबाना नाज के चुनाव निशान बोतल की धूम मची हुई थी। न सिर्फ अल्पसंख्यक वरन अन्य वर्ग के लोग भी उनके समर्थन में बोतल लिए घूमते दिखे। शबाना ने पिछला चुनाव भी निर्दल प्रत्याशी के तौर पर लड़ा था, वे रनर रही थीं। चुनाव के कुछ दिनों बाद ही उनके पति गुल्लू की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वे इसके बाद भी चुनाव मैदान में उतरीं तो उनके साथ सहानुभूति की लहर दिखी। इसी के चलते शुरू से ही उनका दबदबा रहा।
हालांकि चौकाने वाली स्थिति यह रही कि यहां भाजपा प्रत्याशी प्रदीप गुप्त उर्फ शंकर मुख्य मुकाबले में रहे। मतदान से पहले उन्हें मजबूत प्रत्याशी नहीं माना जा रहा था लेकिन उन्होंने इसे गलत साबित कर दिया। यहां उन्होंने सपा, बसपा पव एआईएमआईएम प्रत्याशी को काफी पीछे छोड़ दिया। शबाना की जीत को लेकर शाम होने के समय कई तरह की अटकलों का भी बाजार गर्म रहा। हालांकि उन्हें विधिवत जीत का प्रमाणपत्र सौंप दिया गया।