अंबेडकरनगर। नगर पालिका जलालपुर में दूषित पानी को तमसा नदी में गिरने से रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जाना है। इसके लिए लंबे समय से जमीन की तलाश की जा रही है। कार्यदायी संस्था जल निगम एसटीपी का प्रस्ताव पिछले वर्ष ही बनाकर नगर पालिका को सौंप चुकी है, लेकिन इसके लिए जरूरी पांच बीघा जमीन न मिल पाने से योजना कागजी साबित हो रही है। हालांकि पालिका की ओर से जमीन की काफी तलाश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब पालिका क्षेत्र के बाहर जमीन की तलाश की जा रही है।
प्लांट के लिए एक एकड़ जमीन की आवश्यकता है, लेकिन राजस्व विभाग ने जलालपुर नगर पालिका में इतनी जमीन न होने की बात बताई है। नगर की आबादी एक लाख से अधिक है, जिससे घरों, दुकानों और संस्थानों से प्रतिदिन भारी मात्रा में गंदा पानी और ठोस कचरा निकलता है। इस प्लांट के बनने से नगर के सीवेज और स्टार्म वाटर ड्रेनेज के जरिये निकलने वाले जल को शोधित कर उसे सिंचाई व कृषि कार्य में उपयोग के साथ ही भूगर्भ के गिरते जलस्तर को भी सुधारा जा सकेगा। वर्षों से लंबित इस परियोजना के पूरा होने से तमसा नदी में गिरने वाले गंदे पानी से फैलने वाले प्रदूषण से निजात मिल सकेगी।
नगर के कई वार्डों से निकलने वाला गंदा पानी तमसा नदी में गिरता है। इस समस्या से निजात के लिए नगर पालिका एसटीपी निर्माण की योजना भी पहले ही बना चुकी है। इसकी जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था जल निगम को सौंपी गई थी, उसने 2024 में ही एसटीपी के निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया। लेकिन नगर पालिका की ओर से पांच बीघा जमीन नहीं चिह्नित कर पाने के चलते यह प्रस्ताव अब तक स्वीकृत नहीं हो सका।
नदी के किनारे होनी चाहिए जमीन
एसटीपी प्लांट के लिए नदी के किनारे ही जमीन हो तो बेहतर होगा। इसके साथ ही बंजर जमीन की तलाश की जा रही है। इन सबके कारण जमीन नहीं मिल पा रही है। राजस्व विभाग से लेकर पलिका तक ने काफी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली।
एसटीपी प्लांट के लिए जमीन की तलाश काफी समय से की जा रही है, लेकिन अभी उपयुक्त जमीन नहीं मिल पाई है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों को भी इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है। जमीन के मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। -अरविंद कुमार, ईओ जलालपुर