बरियावन में ध्वस्त किए गए मकान का मलबा। संवाद
अंबेडकरनगर। अकबरपुर के बरियावन-किछौछा मार्ग पर जिस जमीन के अगले हिस्से को खाली कराने के लिए कथित तौर पर कानून हाथ में लेकर बुलडोजर चलवाया गया, उसे अयोध्या निवासी इंद्रजीत ने करीब एक साल पहले खरीदा था। इसके बाद से जमीन के अलग-अलग हिस्सों की बिक्री होती रही। बीते 15 सितंबर को जमीन के बड़े हिस्से का 30 लाख रुपये में बिक्री अनुबंध जलालपुर निवासी रणदीप वर्मा के नाम किया गया। अनुबंध में सपा और भाजपा नेता का नाम बतौर गवाह दर्ज है।
अभिलेखों के अनुसार, 18 जुलाई 2025 को रामउजागिर ने समसुद्दीनपुर गयासपुर निवासी पूजा वर्मा के नाम 126.58 वर्गमीटर जमीन का एग्रीमेंट किया था। इसके बाद रामउजागिर, उनके भाई रामकुमार व रामनाथ ने 13 अगस्त 2025 को गाटा संख्या 469 की 0.2090 हेक्टेयर जमीन का बिक्री अनुबंध अयोध्या निवासी इंद्रजीत के नाम किया। 15 अक्तूबर 2025 को इसका बैनामा इंद्रजीत के नाम हुआ और दाखिल-खारिज भी हो गया।
इसके बाद इंद्रजीत ने जमीन के हिस्सों की बिक्री शुरू कर दी। 25 अक्तूबर 2025 को पूजा वर्मा को 126.40 वर्गमीटर और ब्रजेश कुमार निवासी चंदनपारा अकबरपुर को 111.53 वर्गमीटर जमीन बेची गई। 24 फरवरी 2026 को अमरनाथ निवासी पिपरी सैदपुर टांडा को 83.65 वर्गमीटर, 13 मार्च को नीलू निवासी समसुद्दीनपुर गयासपुर को 139.41 वर्गमीटर और दीपिका निवासी सुरजीपुर जमीलपुर, सगड़ी आजमगढ़ को 89.22 वर्गमीटर जमीन बेची गई। सात अप्रैल को सरोज श्रीवास्तव निवासी बहादुरपुर गयासपुर को 83.65 वर्गमीटर जमीन बेची गई।
15 सितंबर 2026 को इंद्रजीत ने रणदीप वर्मा निवासी मसूदपुर जलालपुर के नाम 0.760 हेक्टेयर जमीन का 30 लाख रुपये में अनुबंध किया। रणदीप सपा नेता के सगे भाई बताए जा रहे हैं। अनुबंध में दर्ज दो गवाहों में एक भाजपा नेता हैं। शेष जमीन अभी भी इंद्रजीत के नाम दर्ज है, जिसमें मुख्य सड़क से लगा अगला हिस्सा भी शामिल है। इस अनुबंध के महज पांच दिन बाद 20 सितंबर की रात दर्जनों लोग तीन जेसीबी लेकर पहुंचे और बिना किसी कानूनी कार्रवाई के करीब 11 मकान व दुकानों को ध्वस्त कर दिया।
सभी दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी
बरियावन प्रकरण में सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों और लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। घटना में शामिल सभी दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी। अलग-अलग अधिकारियों को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। - ईशा प्रिया, जिलाधिकारी