अंबेडकरनगर। जांच के लिए जरूरी किट की कमी से जिले के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में खून से जुड़ी जांचें नहीं हो पा रही हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में रक्त से जुड़ी हीमोग्लोबिन, टायफायड, हेपेटाइटिस बी के साथ ही टीएलसी व डीएलसी जांच के लिए पहुंचने वाले मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर निजी पैथालॉजी संचालक जांच शुल्क के नाम पर मनमानी वसूली कर दिक्कतों को और बढ़ा रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में इलाज की बेहतर सुविधा मुहैया कराने के तमाम दावों के बाद भी मरीजों को जरूरी जांचों से लेकर दवाओं तक के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में जहां एमआरआई जांच बंद पड़ी है वहीं वहीं जिला अस्पताल में भी डिजिटल एक्सरे व अल्ट्रासाउंड से लेकर लैब में होने वाली रक्त से जुड़ी तमाम जांचे भी नहीं हो पा रही है।
खून से जुड़ी जरूरी जांचे बंद होने से जिले में संचालित दस सीएचसी व 28 पीएचसी में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों के जांच की उम्मीद में अस्पतालों के चक्कर काटना पड़ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जिले में लंबे समय से जांच के लिए जरूरी पर्याप्त किट की खरीद नहीं हुई है। क्योंकि औषधि एवं रसायन मद में आने वाली रकम में से ज्यादातर का भुगतान लंबित देयता निपटाने में हो जाता है। अब इसी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
लगाना पड़ रही जिला अस्पताल तक दौड़
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जहांगीरगंज में जांच के लिए जरूरी उपकरण व मशीन दुरुस्त न होने के कारण खून से जुड़ी छोटी बड़ी सभी जांचों के लिए मरीजों को जिला अस्पताल तक की दौड़ लगाना पड़ रही है। बुधवार को यहां के रक्त जांच केंद्र पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा दिखा। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि बीते आठ माह से लैब की सीबीसी मशीन खराब पड़ी है। ऐसे में जांच के लिए पहुंचे जहांगीरगंज निवासी लालचंद के परिजनों जिला अस्पताल तक का चक्कर लगाना पड़ा।
लंबे समय से नहीं हो रही जांच
रामनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी हेपेटाइटिस बी, टायफायड व ब्लड ग्रुप की जांच से जुड़ी किट उपलब्ध नहीं है। यह जांच कराने के लिए आने वाले मरीजों को बैरंग वापस लौटना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में यह जांच मुफ्त में उपलब्ध होती है लेकिन यहां लंबे समय से खून से जुड़ी अधिकांश जांच नहीं हो पा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी प्रमुख जांचों की किट ही उपलब्ध नहीं है। इंदईपुर के रमेश व विश्राम ने कहा कि अस्पताल में जांच न होने से निजी लैब में महंगी जांच कराने को विवश होना पड़ रहा है।
मनमानी वसूली कर रहे निजी लैब
सरकारी अस्पतालों में खून से जुड़ी जांच न होने का सीधा फायदा निजी लैब जांच के नाम पर मनमानी शुल्क वसूली कर उठा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निजी लैब संचालक जांच की रिपोर्ट जल्द ही देने के झांसा देकर निर्धारित दर से अधिक की शुल्स वसूली कर परेशान कर रहे हैं। इसकी शिकायत के बाद भी रोकथाम के लिए जिम्मेदारों के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
जल्द ही दूर होगी परेशानी
खून से जुड़ी जांच ज्यादातर जांचे सरकारी अस्पतालों में हो रही है। कुछ जगहों पर संसाधनों की कमी अथवा मशीन खराब होने के कारण दिक्कत आ रही है। इस परेशानी को दूर कराने के विभागीय प्रयास किए जा रहे हैं। भरोसा दिलाया कि अगले सप्ताह तक संसाधनों की उपलब्धता से जांच कार्य पूरी तरह पटरी पर आ जाएगा। -डॉ. श्रीकांत शर्मा, सीएमओ