अंबेडकरनगर। शिथिल कार्य प्रणाली के चलते धान खरीद बंद हो जाने के बाद भी नौ हजार से अधिक किसानों का तीन करोड़ का भुगतान बीच में अटका है। बकाया भुगतान पाने को किसानों को खरीद एजेंसियों के कार्यालय के चक्कर काट परेशानी उठानी पड़ रही है।
28 फरवरी को खत्म हुई सरकारी धान खरीद के लिए जिले में पांच एजेंसियों के 44 केंद्र संचालित किए गए थे। धान खरीद का कार्य समाप्त होने पर निर्धारित लक्ष्य 1.20 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीद हुई थी। धान खरीद में लक्ष्य से अधिक खरीद तो कर लिया गया लेकिन अब धान बेचने वाले किसानों का बकाया भुगतान पाने के लिए भटकना पड़ रहा है। भुगतान न होने से 9 हजार से अधिक धान किसानों की 3.20 करोड़ की राशि बीच में अटकी है। खाद्य एवं विपणन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि सबसे ज्यादा भुगतान बकाया पीसीएफ पर है।
बरधाभिउरा के किसान पंकज वर्मा ने बताया कि लगभग 70 कुंतल धान की बिक्री खरीद केंद्र को की थी। 58 कुंतल का भुगतान तो हो गया, लेकिन 12 कुंतल का भुगतान अभी भी अटका है। चांदपुर भटपुरा के रणवीर व अमेदा के जितेंद्र ने बताया कि भुगतान के लिए लगातार पीसीएफ के कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद भी टरकाया जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक बदहाली भी झेलनी पड़ रही है। इससे राहत दिलाने को प्रशासन तत्काल बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित कराए।
जिन किसानों को धान खरीद का भुगतान नहीं हुआ है, उसमें से ज्यादातर किसानों के खाता नंबर व अन्य कागजातों में गड़बड़ी है। इसके लिए संबंधित किसानों को जानकारी भी दी जा चुकी है। गड़बड़ी दूर कराने वाले किसानों को तत्काल भुगतान राशि मुहैया कराने का निर्देश भी दिया गया है।
डा. पंकज कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी