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मुश्किल में अन्नदाता, ज्यादातर खेतों में पड़ रही दरारें

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अंबेडकरनगर। लगातार बढ़ते तापमान के बीच बारिश न होने से किसानों के चेहरे पर चिंता साफ नजर आने लगी है। सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने से खेतों में खड़ी गन्ने की फसलें सूख रही हैं। खेत तैयार न होने से किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि इसी तरह मौसम रहा तो न सिर्फ गन्ने की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी, बल्कि धान की रोपाई का कार्य भी प्रभावित होगा। उधर, शुक्रवार को सुबह से ही लोगों को उमसभरी भीषण गर्मी से जूझना पड़ा। बारिश न होने से परेशान लोग अब मंदिरों और मस्जिदों में प्रार्थना कर रहे हैं।
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मौसम की मार से अन्नदाता मुश्किल में है। जुलाई माह का प्रथम सप्ताह बीतने को है, लेकिन बारिश का दूर दूर तक पता नहीं है। सिंचाई न होने से खेत सूख गए हैं। मिट्टी में दरारें पड़ने लगी हैं। गन्ने की फसल सिंचाई के अभाव में सूखने लगी है। अकबरपुर के गन्ना किसान संजय विश्वकर्मा व मंगल वर्मा ने कहा कि बारिश न होने व सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने से गन्ने की फसल सूख गई है। यदि ऐसा ही मौसम रहा तो गन्ने की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। किसान पवन कुमार सिंह व अरुण कुमार ने कहा कि मौसम के मिजाज को देखकर अब लगने लगा है कि सूखा पड़ जाएगा।
यदि ऐसा हुआ तो किसान बड़ी मुश्किल में पड़ जाएंगे। किसान जियाराम पटेल ने कहा कि बारिश न होने व सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने से गन्ने की फसल तो सूख ही रही है। धान की रोपाई का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। जुलाई के प्रथम सप्ताह में रोपाई का कार्य हो जाना चाहिए था, लेकिन ज्यादातर क्षेत्रों में किसान रोपाई नहीं कर सके हैं। यदि इसी प्रकार का मौसम रहा, तो इसका सीधा असर उपज पर पड़ेगा। ऐसे में पहले से ही विभिन्न मुश्किलों से जूझ रहे किसानों के समक्ष परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा।
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शुक्रवार को सुबह से ही निकली तपिशभरी धूप से लोग बेहाल रहे। गर्मी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तापमान दिन में 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। उमसभरी गर्मी के चलते लोग घरों से निकलने से हिचकिचा रहे थे। जरूरी कार्य से ही मजबूरीवश लोग घर से निकल रहे थे। ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी बाजारों का रुख कम कर रहे। नतीजा यह है कि भीषण गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव व्यवसाय पर भी पड़ रहा है। बाजारों में दिन में आमतौर पर सन्नाटे का माहौल रहता है। दुकानदारों का कहना है कि ऐसा बारिश न होने के चलते हो रहा है।
लगातार बढ़ते तापमान के बीच बिजली ने भी उपभोक्ताओं का साथ छोड़ दिया है। अघोषित विद्युत कटौती से नागरिकों में त्राहि-त्राहि मची हुई है। सबसे अधिक मुश्किल रात्रिकालीन कटौती के चलते उपभोक्ताओं को हो रही है। ग्रामीण क्षेत्र की बात दूर जिला मुख्यालय के ही उपभोक्ताओं को रोस्टर के अनुसार बिजली नहीं मिल रही। रोस्टर 24 घंटे का है, लेकिन बमुश्किल 16 घंटे ही बिजली नसीब हो रही। उसमें में बार बार की ट्रिपिंग होती रहती है। भीषण गर्मी के चलते केबिल पिघलकर टूट रही है, तो ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर जवाब दे रहे। इससे भी सुचारु विद्युत आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है।
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