शिक्षा विभाग ने ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को संबंधित विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की सत्यापित संख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। ड्रेस के लिए जिले में धनराशि पहुंचने से दो हजार 45 विद्यालयों में अध्ययनरत दो लाख 19 हजार 670 छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा।
छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों में परिषदीय विद्यालयों का आकर्षण बना रहे, इसके लिए एमडीएम व निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराने के साथ ही निशुल्क ड्रेस भी उपलब्ध कराने की योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के तहत प्रत्येक छात्र-छात्रा को दो-दो जोड़ी ड्रेस देने का प्राविधान है।
नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हुआ, तो छात्र-छात्राओं को नई ड्रेस मिलने की उम्मीद भी बढ़ने लगी। जैसे-जैसे समय बीता, नई ड्रेस नहीं मिलने से उनमें मायूसी छाने लगी थी। नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हुए चार माह से अधिक समय बीत गया, लेकिन उन्हें ड्रेस नहीं मिली। ड्रेस कब मिलेगी? इसका जवाब संबंधित अधिकारियों के पास नहीं था।
नतीजतन जिले के दो हजार 45 विद्यालयों में अध्ययनरत दो लाख 19 हजार 670 छात्र-छात्राएं पुरानी व फटी ड्रेस में ही विद्यालय जाने को मजबूर हो रहे थे। इस बीच दो दिन पूर्व ड्रेस उपलब्ध कराने के लिए शासन से जिला बेसिक शिक्षा विभाग को छात्र-छात्राओं की संख्या के सापेक्ष 75 प्रतिशत धनराशि छह करोड़ 59 लाख एक हजार रुपये उपलब्ध करा दिया गया।
दरअसल 75 प्रतिशत धनराशि पहले उपलब्ध कराई जाती है तथा शेष 25 प्रतिशत धनराशि ड्रेस वितरण के सत्यापन के बाद दी जाती है। बीएसए डॉ. राजबहादुर मौर्य ने बताया कि छात्र-छात्राओं की संख्या के आधार पर कुल आठ करोड़ 78 लाख 68 हजार रुपये की आवश्यकता थी। 75 प्रतिशत धनराशि प्राप्त हो गई है।
बताया कि प्रति छात्र दो जोड़ी ड्रेस के लिए 400 रुपये की दर से शीघ्र ही विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में रकम भेजी जाएगी। छात्र-छात्राओं को ड्रेस के लिए और अधिक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को अपने अपने क्षेत्र में स्थित विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की सत्यापित संख्या अतिशीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।