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धीमी गति से बन रहा कम्हरिया घाट पुल

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अंबेडकरनगर के कम्हरिया घाट पर वर्षों से अधर में लटका पुल निर्माण कार्य। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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राजेसुल्तानपुर। आलापुर तहसील क्षेत्र में सरयू नदी के कम्हरिया घाट पर करीब दो अरब रुपये की लागत से निर्माणाधीन पुल सुस्त रफ्तारी का शिकार होकर रह गया है। लगभग छह वर्ष बीत जाने के बाद भी पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। इससे नदी के दोनों तरफ के आधा दर्जन जिलों के नागरिकों को आवागमन में दिक्कतें हो रही हैं। जबकि लक्ष्य के अनुरूप इस पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2017 में ही पूरा हो जाना चाहिए था। परंतु सुस्त निर्माण कार्य के चलते अब तक इसका कार्य पूरा नहीं हो सका।
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सरयू नदी के कम्हरिया घाट पर वर्ष 2014 में एक अरब 93 करोड़ 97 लाख 20 हजार रुपये की लागत से पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस कार्य को वर्ष 2017 में तीन वर्ष में पूरा होना था। परंतु निर्माण कार्य धीमी गति से होने के कारण 6 वर्ष बाद भी कार्य पूरा नहीं हो सका। निर्माण का जिम्मा उत्तर प्रदेश सेतु निगम विभाग की ओर से मित्तल कंपनी व आरके कंपनी को दिया गया है। नदी पर पुल के निर्माण के लिए कुल 46 पिलर बनने हैं। इसमें गोरखपुर जनपद में अभी तक 26 पिलर तैयार कर उसके ऊपर छत की ढलाई की गई है।
वहीं अंबेडकरनगर जनपद में भी 4 पिलर तैयार कर उसके ऊपर छत की ढलाई की गई है। नदी में 16 पिलर अभी बनने बाकी हैं। इस पर कार्य चल रहा है। कम्हरिया घाट के सरयू नदी पर पुल बनाने को लेकर सर्वहित बैनर तले सतवंत प्रताप सिंह व भिखारी प्रजापति के नेतृत्व में वर्ष 2013 मे 15 अप्रैल से 24 अप्रैल तक धरना प्रदर्शन भी चला था। पुल निर्माण की घोषणा न होने पर सतवंत प्रताप सिंह ने सरयू नदी में जल समाधि लेने का निर्णय कर लिया था। इस दौरान ग्रामीणों व पुलिस बल के बीच संघर्ष भी हुआ था। उसी के बाद पुल निर्माण का कार्य शुरू हुआ था।
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कई जिलों के लोगों को होती है दिक्कत
सरयू नदी पर पुल का निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण कई जनपदों के नागरिकों को आवागमन में मुश्किल हो रही है। वर्ष में सात माह नागरिक कम्हरिया घाट पर पीपे के पुल से आवागमन करते हैं। परंतु जलस्तर बढ़ने पर इस पुल से आवागमन रोक दिया जाता है। नागरिकों को इससे दिक्कतें होती हैं। लोगों को नाव के सहारे आवागमन करना पड़ता है। इतना ही नहीं मात्र 65 किलोमीटर की दूरी को तय करने के लिए चार पहिया वाहन को बिड़हर घाट पुल होते हुए खलीलाबाद के रास्ते गोरखपुर जाना पड़ता है। इससे 50 से 55 किलोमीटर की दूरी अधिक तय करने के साथ-साथ समय की बर्बादी होती है। यदि इस पुल का निर्माण हो जाएगा तो अंबेडकरनगर, आजमगढ़, जौनपुर, इलाहाबाद, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ व गोरखपुर आदि जनपद के नागरिकों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
अभी दो साल लगेेंगे
पुल का निर्माण कार्य पूरा करने में अभी करीब दो साल लगेंगे। मौजूदा समय में कार्य तेजी से कराया जा रहा है। नदी में जलस्तर बढ़ने की वजह से कार्य में अवरोध उत्पन्न हो रहा था। उम्मीद है कि सब कुछ सही रहा तो वर्ष 2022 में पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
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- कमलेश तिवारी, सहायक अभियंता उत्तर प्रदेश सेतु निगम
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