अंबेडकरनगर। जिला पंचायत में मानकों को ताक पर रखकर करोड़ों के काम करा लिए गए। लगभग नौ करोड़ की लागत से सड़कों की विशेष मरम्मत व लेपन के ज्यादातर कार्य ठंड में करा डाले गए जबकि तारकोल से जुड़े कार्य आमतौर पर ज्यादा ठंड के मौसम में नहीं होते हैं। हालांकि काम कराने व जल्दी भुगतान पाने की हड़बड़ी इस कदर रही कि नियम कानून के साथ ही गुणवत्ता तक की परवाह नहीं की गई। तमाम सड़कों की मरम्मत के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी हुई। ऐसे में बाकी का धन कहां गया यह हर कोई आसानी से समझ सकता है।
सरकार की विभिन्न योजनाओं के नाम पर मिलने वाली रकम से यूं तो आम जनता के लिए विकास के कार्य होते हैं, लेकिन इसी के नाम पर धांधली का भी जरिया खोज लिया जाता है। कुछ ऐसा ही हाल जिला पंचायत अंबेडकरनगर का है। यहां गड़बड़ झाले व मनमानी की पोल अब एक एक कर खुल रही है। बीते दिनों जहां अमर उजाला ने बाबूराज को उजागर किया था, वहीं एक दिन पहले यह रहस्योद्घाटन हुआ था कि लगभग 23 करोड़ के कार्यों के ठेके बिना ई-टेंडरिंग के ही सौंप दिए गए।
अब सूत्रों के हवाले से इन कार्यों के नाम पर की गई नई मनमानी व गड़बड़झाला सामने आया है। इसके अनुसार जिला पंचायत ने लगभग नौ करोड़ रुपये की लागत से 86 सड़कों की विशेष मरम्मत व लेपन का ज्यादातर कार्य ठंड के उस मौसम में करा डाला, जिस समय ऐसे कार्यों को आमतौर पर नहीं कराया जाता। दरअसल 12 डिग्री से अधिक तापमान होने पर ही तारकोल से जुड़े निर्माण कार्य कराए जाते हैं, जिससे सड़कों की गुणवत्ता ठीक ढंग से बनी रह सके। इसके बावजूद कई सड़कों की मरम्मत व लेपन आदि कार्य नवंबर व दिसंबर माह में करा डाले गए।
मरम्मत के यह कार्य नवंबर व दिसंबर माह में तब हुए जबकि तमाम दिन तापमान 5 से 10 डिग्री तक रहा। ऐसे में सड़क की गुणवत्ता का अंदाजा सहज ढंग से लगाया जा सकता है। निजी क्षेत्र में कार्यरत सहायक अभियंता पंकज त्रिपाठी ने कहा कि ठंड के मौसम में तारकोल वाली सड़क का निर्माण या मरम्मत नहीं कराया जाता है। इसके लिए ठंड कम होने का इंतजार होता है, जिससे सड़क की गुणवत्ता बेहतर रह सके।
निर्माण के नाम पर इस तरह की हड़बड़ी रही कि कई मार्गों पर तो मरम्मत व लेपन के नाम पर सिर्फ रस्मअदायगी ही हुई है। कई जगहों पर तीन से दस लाख रुपये तक का कार्य होना दिखाया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि सिर्फ इक्का दुक्का जगह डामर लगाकर काम को पूरा दिखा दिया गया। आलापुर तहसील में जहांगीरगंज से रामनगर मार्ग पर तहसील मुख्यालय से मनवरपुर तक सड़क की लेपन का कार्य दस लाख रुपए में होना था। यह कार्य पूर्ण हो गया।
बाकायदा बोर्ड लग गया, लेकिन हकीकत यह कि मरम्मत के नाम पर महज दिखावा हुआ। स्थानीय जिला पंचायत सदस्य प्रदुम्मन यादव का भी नाम बोर्ड पर अंकित है। अमर उजाला ने उनसे सड़क की गुणवत्ता के बारे में पूछा तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आननफानन में हुए निर्माण के नाम पर सिर्फ मजाक हुआ है। ऐसा किसी एक मार्ग पर नहीं है। तमाम निर्माण कार्य इसी मनमाने ढंग से हुए हैं। मैंने व कुछ अन्य जिला पंचायत सदस्यों ने निर्माण के समय ही शिकायत भी की थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।
जिला पंचायत में विकास के जो कार्य लंबित हैं, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा कराया जाएगा। अभियंताओं को इस बारे में निर्देश पहले ही दे दिए गए हैं। बीते दिनों के व मौजूदा समय के किसी भी कार्य में गड़बड़ी पाई गई तो उस पर जवाबदेही तय होगी। विकास के नाम पर किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।
राकेश कुमार मिश्र, प्रशासक/डीएम