आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के मसेना मिर्जापुर स्थित शांति विहार कॉलोनी में चातुर्मास कथा का आयोजन किया जा रहा है। रविवार को प्रवाचक श्रीनिवास दास वेदांती ने राम-सीता विवाह से जुड़े पौराणिक रहस्यों के बारे में बताया। कहा कि जनकपुर (वर्तमान नेपाल) भी उतना ही पवित्र है जितनी अयोध्या, क्योंकि एक राम की जन्मभूमि है तो दूसरी सीता की।
चातुर्मास कथा का मंच पूजन भाजपा जिला अयोध्या प्रभारी डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी ने किया। प्रवाचक ने शास्त्रों में वर्णित एक गो-श्राप की घटना का वर्णन किया। कथा के अनुसार एक व्यक्ति अपनी पत्नी को लेने जनकपुर जा रहा था। रास्ते में उसे दलदल में फंसी एक गाय मिली। उसने उसे बचाने के बजाय गाय की पीठ पर पैर रखकर दलदल पार किया। मरते समय गाय ने उसे श्राप दिया कि वह अपनी पत्नी को देख नहीं पाएगा और देखेगा तो अंधा हो जाएगा। यही हुआ, व्यक्ति अंधा हो गया और अपनी पत्नी के साथ राजा जनक के दरबार में पहुंचा। श्राप से मुक्ति के लिए उपाय बताया गया कि यदि कोई सच्ची पतिव्रता स्त्री चलनी में गंगाजल भरकर उसकी आंखों पर छींटे मारे, तो वह ठीक हो जाएगा। राजा जनक ने देशभर में संदेश प्रसारित करवाया। जब यह समाचार अयोध्या पहुंचा, तो राजा दशरथ ने एक दासी को, जो स्वयं को पतिव्रता कहती थी, को जनकपुर भेजा। दासी ने गंगाजल छलनी में भरकर चमत्कार कर दिखाया। राजा जनक स्तब्ध रह गए। राजा जनक ने सोचा कि अयोध्या की एक दासी में इतनी शक्ति है, तो वहां के राजकुमार की शक्ति की कल्पना भी नहीं की जा सकती। स्वयंवर से पूर्व राजा जनक ने महर्षि विश्वामित्र को यज्ञ में आमंत्रित किया था। विश्वामित्र अपने शिष्य राम और लक्ष्मण को साथ लेकर जनकपुर पहुंचे। राम ने धनुष भंग कर सीता से स्वयंवर किया।