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जेल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ीं, जांच टीम गठित

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अंबेडकरनगर। जिला जेल में बंदी की मौत ने जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। धारदार हथियार से बंदी के सिर पर चोट कर हत्या का केस दर्ज होने के साथ जेल अधिकारियों व बंदी रक्षकों पर शिकंजा कसा जाने वाला है। डीएम सैमुअल पॉल एन ने जेल के अंदर के समूचे हालात की प्रशासनिक जांच कराने के लिए टीम गठित कर दी है। एसडीएम सदर को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। माना जा रहा है कि इसमें सामने आने वाली खामियों को स्थानीय स्तर पर दूर कराने के साथ ही पूरे प्रकरण से शासन को भी अवगत कराया जाएगा।
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जिला जेल में बंदी रामसागर की मौत को लेकर जेल प्रशासन के लिए आने वाला दिन कठिनाइयों से घिरा दिख रहा है। एक तरफ जहां बंदी की मौत को लेकर जनपद न्यायाधीश पदमनरायन मिश्र ने न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है, वहीं जेल के हालात को लेकर डीएम सैमुअल पॉल एन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बंदी की मौत व इसे लेकर जेल प्रशासन की गलत बयानी को अत्यंत गंभीर माना है। दरअसल जेल अधीक्षिका हर्षिता मिश्रा ने लिखित तौर पर सूचना दिया था कि बंदी को घबराहट व सीने में तेज दर्द के बाद इलाज कराया गया। इसी बीच उसकी मौत हो गई। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गंभीर चोट पाई गई। परिजनों ने हत्या का आरोप पहले ही दिन से लगाना शुरू किया। दूसरे दिन जब पोस्टमार्टम हुआ, तब जेल प्रशासन की पोल खुल गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद डीएम ने पाया कि बंदी की मौत को लेकर न्यायिक जांच से इतर एक विस्तृत प्रशासनिक जांच भी कराए जाने की जरूरत है। डीएम इस बात पर नाराज दिखे कि जेल प्रशासन ने यह जानकारी नहीं दी कि बंदी के सिर पर चोट भी आई थी। डीएम ने कहा कि चोट जिन भी परिस्थिति में आई रही हो, लेकिन सही तथ्य सामने आने चाहिए थे।
प्रशासनिक जांच के लिए डीएम ने बुधवार को एक सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दिया। एसडीएम सदर पवन जायसवाल को विस्तृत जांच करने का निर्देश डीएम ने दिया है। इसमें कहा गया कि जेल में जाकर वहां के हालात आदि की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। गौरतलब है कि कैदियों के बीच गुटबंदी होने तथा बंदी रक्षकों द्वारा खेमे बंदी में शामिल होने के अलावा अवैध वसूली करने के तमाम आरोप लगे हैं। एसडीएम द्वारा इन सब आरोपों की विस्तृत जांच होगी।
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हालात को छिपाने में बिगड़ा माहौल
जेल के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। इसका प्रमाण बंदी के सिर पर धारदार हथियार से आई चोट के अलावा उन बंदियों के बयान से भी मिलता है, जिन्होंने बताया कि जेल के अंदर कुछ बंदी रक्षकों द्वारा जमकर मनमानी की जा रही है। बंदी रामसागर के साथ जेल में बंद रहे सह अभियुक्त ने जेल से वापस आकर बताया था कि जब उसने रामसागर की पिटाई आदि की शिकायत किया तो कई बंदी रक्षकों ने उसका उत्पीड़न किया। बताया कि कई बंदी रक्षक जेल में अपना साम्राज्य चलाते हैं। वे बंदियों के साथ भेदभाव करते हैं। उनका उत्पीड़न करते हैं। काम न करने के बदले अवैध वसूली भी होती है। जेल से वापस आए कई बंदियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जेलर व जेल अधीक्षक के संज्ञान में सब कुछ होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती। नतीजा यह है कि बंदियों के बीच गुटबंदी बढ़ रही। उनका उत्पीड़न हो रहा। इस पर रोक लगाने की बजाए जेल प्रशासन इसे छिपाने की कोशिश में ही लगा रहा। नतीजा यह हुआ कि जेल में मनमानी और बढ़ गई। इसी का दुष्परिणाम अब बंदी रामसागर की मौत के रूप में सामने आया है।
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