मंगलवार शाम से शुरू हुआ बूंदाबादी का दौर बुधवार सुबह भी जारी रहा। हालांकि बारिश तो दिन भर नहीं हुई, लेकिन बादलों के छाए रहने से धूप नहीं निकली। ऐसे में लोग गर्म कपड़े पहने दिखाई दिए।
मौसम के इस रुख को देखकर किसान काफी चिंतित हैं। किसान धान मड़ाई को लेकर परेशान हैं, तो वहीं गेहूं व अन्य फसलों की बुवाई जो किसान नहीं कर सके हैं, उन्हें भी विलंब होने का अंदेशा सता रहा है।
मौसम के बदले रुख ने एक तरफ जहां लोगों को ठंड का एहसास कराना शुरू कर दिया है, वहीं किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। नवंबर माह तक लोगों को सुबह-शाम ही ठंड का एहसास हो रहा था। धूप निकलने के साथ ही लोगों की ठंड दूर हो जाती थी। गर्म कपड़े भी लोग सुबह-शाम ही पहने दिखाई दे रहे थे।
मगर दिसंबर माह के शुरू होते ही ठंड का असर दिन में भी दिखने लगा। मंगलवार को लोगों को कोहरे का सामना करना पड़ा। बादलों की वजह से बुधवार को कोहरा तो नहीं छाया, लेकिन मंगलवार सायं से शुरू हुई बूंदाबांदी का दौर बुधवार सुबह भी दिखा।
आसमान में उमड़-घुमड़ रहे बादलों को देखकर सबसे ज्यादा किसान परेशान है। धान की कटाई तो अधिकांश किसानों ने कर ली है, लेकिन मड़ाई का कार्य अभी अधूरा है। ऐसे में बारिश हो जाने पर मड़ाई के लिए इकट्ठा की गई धान की फसलों को तगड़ी क्षति पहुंचने की आशंका है।
यही नहीं जिन किसानों ने अब तक रबी फसल यानि गेहूं, सरसों, चना व मटर आदि की बुवाई नहीं की है, वह भी चिंतित हैं। कारण यह है कि बारिश हो जाने पर खेतों में पानी भर जाएगा। इससे जुताई कार्य नहीं हो पाएगा। इटहिया के नरेंद्र सिंह व चांदपुर के उमापति वर्मा आदि किसानों ने मौसम के रुख पर चिंता जताते हुए कहा कि बारिश हो जाने पर फसलों की बुवाई पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है।