विधिविधान से पूजन-अर्चन करते हैं। पूरे माह पवित्र स्थानों व नदियों से जल लेकर यहां भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए कांवरियों का जत्था लगातार पहुंचता रहता है।
नगर क्षेत्र के भीतर वटवृक्ष के नीचे स्थापित एकमात्र यह शिवालय सावन में श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहता है। मान्यता है कि सावन माह में वट वृक्ष के नीचे स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक करना विशेष फलदायी होता है।
इसी के लिए यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। नागपंचमी पर्व पर यहां भारी तादाद में कांवरिए भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। मंदिर परिसर में भगवान शिव के अलावा अन्य देवताओं के भी विग्रह स्थापित हैं। प्रत्येक दिन शाम होने वाली आरती में मोहल्ले के लोग पूरी श्रद्धाभाव के साथ एकत्र होते हैं।
स्थानीय विजय मौर्य के मुताबिक सावन माह में यहां भगवान भोले शिव की आराधना एवं पूजा मात्र से ही भक्तों के कष्टों का निवारण हो जाया करता है। इसीलिए इस दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी आमद बनी रहती है। मंदिर परिसर तो बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन श्रद्धालुओं के मुताबिक यहां पहुंचने से व्यापक शांति एवं सकून का एहसास होता है।
भीड़ के दौरान लोग लाइन में लगकर काफी देर तक खड़ा रहना यहां अपना सौभाग्य मानते हैं। दिवाकर व अभिषेक के मुताबिक नर्वदेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से मन को जो सुख मिलता है, उसका एहसास सबको नहीं हो सकता। भक्तों के मुताबिक सच्चे मन से भोले के दरबार में आने पर भगवान उनका कल्याण जरूर करते हैं।