पूर्व में सूखे की मार से जूझ चुके किसानों के लिए सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद को लेकर पसरा यह माहौल और ज्यादा परेशान करने वाला हैै। धान बिक्री को लेकर किसान एक केंद्र से दूसरे केंद्र का चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। कई केंद्रों पर पर अभी खरीद ही नहीं शुरू की गई है।
प्रकृति के प्रकोप व सूखे की मार झेलने के बाद शासन ने भले ही बीते दिनों जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया हो, लेकिन इसके बाद भी किसानों को राहत दिलाने के लिए धान की खरीद में तेजी तय नहीं हो पा रही है।
किसानों का धान सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदा जाय तो निश्चित तौर पर किसानों को इससे अधिक दाम मिलने की उम्मीद बनी रहती है, लेकिन धान खरीद में रुचि न लिए जाने के कारण किसानों की उम्मीदों को गहरा झटका लग रहा है।
वैसे तो विगत वर्षों में धान खरीद का कार्य एक अक्तूबर से ही प्रारंभ कर दिया जाता था, लेकिन धान फसल पर मौसम की मार व देर से फसल तैयार होने को देखते हुए शासन ने इस बार एक नवंबर से धान खरीद का निर्णय लिया था। खाद्य विभाग के छह, कर्मचारी कल्याण निगम के तीन, पीसीएफ के 32, यूपीएसएस के चार, यूपीएग्रो के एक व एफसीआई के दो केंद्रों की स्थापना के साथ साथ 48 आढ़तियों व आठ पंजीकृत सोसाइटी का चयन किया गया।
हालत यह है कि तीन सप्ताह से अधिक बीतने को है, लेकिन अभी तक सिर्फ 1827 मीट्रिक टन धान की ही खरीद हो सकी है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों के धान को लेकर विभिन्न क्रय एजेंसियों का रवैया कैसा है।
इसमें भी विपणन शाखा को छोड़ दिया जाए, तो अन्य एजेंसियों की हालत काफी बदतर है। जाहिर तौर पर इसका खामियाजा स्थानीय किसानों को ही भुगतना पड़ रहा है। कई केंद्रों पर पर अभी खरीद ही नहीं शुरू की गई है। बताते हैं कि कई केंद्रों पर बोरे और धन का अभाव अभी भी बना हुा है।
अकबरपुर के किसान सीताराम, भीटी के भगवानदीन व रामबख्श, टांडा के स्वामीप्रसाद वर्मा व कटेहरी के रामसजीवन ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मौसम के प्रतिकूल प्रभाव के चलते धान की फसल चौपट होने का दंश पहले से ही किसान झेल रहा है, उस पर से अब संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते उन्हें बचीखुशी उपज बिक्री करने में इधर उधर की दौड़ लगानी पड़ रही है।