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इंसानियत का पैगाम देता है इस्लाम

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अंबेडकरनगर। इस्लाम इंसानियत का पैगाम देता है। अल्लाह ने कुरान में कहा है कि सदैव इस बात का ध्यान रखो कि यदि कोई परेशान है, तो उसकी मदद जरूर करें। पड़ोसी का विशेष ध्यान दें। वह इंसानों में से नहीं हो सकता, जो बेगुनाहों का खून बहाता है। ऐसे लोग न तो इंसान हैं और न ही इस्लाम के मानने वाले। यह बातें रविवार को मौलाना गजनफर अब्बास तूसी ने कहीं। वह अकबरपुर नगर के अब्दुल्लाहपुर स्थित बारगाहे हुसैनी में आयोजित मजलिस को संबोधित कर रहे थे।
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मौलाना तूसी ने कहा कि शिक्षा व संस्कार जिसमें दोनों होंगे, उसमें इंसानियत जरूर होगी। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी दें। बेहतर संस्कार दुनियावी तालीम के साथ दीनी तालीम से प्राप्त होता है। कहा कि जो लोग बेगुनाहों का खून बहाते हैं, उन्हें इंसानियत के दायरे में नहीं रखा जा सकता है। कोई भी मजहब बेगुनाहों का खून बहाने की इजाजत नहीं देता है। ऐसे में जो लोग ऐसा कार्य करते हैं, उनका किसी भी मजहब से ताल्लुक नहीं है। मौलाना ने कहा कि अल्लाह ने कुरान में कहा है कि कभी इंसानियत का साथ मत छोड़ना। जिसने इंसानियत का साथ छोड़ा, वह कभी अल्लाह के करीब नहीं जा सकता।
मौलाना तूसी ने कहा कि कर्बला में इमाम हुसेन ने इंसानियत का पैगाम दिया। उन्होंने जालिम बादशाह के आगे सिर झुकाने की बजाय सिर कटा दिया। ऐसा कर उन्होंने यह संदेश दिया कि इंसानियत को बचाने के लिए यदि शहादत देनी पड़े, तो इससे पीछे न हटें। बाद में मौलाना ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। इससे पहले डॉ. फरीद हैदर रिजवी, आरिफ अनवर, नायाब, शादाब ने कलाम प्रस्तुत किए। मजलिस आयोजक साबिर अली एडवोकेट ने मजलिस में आए लोगों का आभार व्यक्त किया।
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