अंबेडकरनगर। इस्लाम इंसानियत का पैगाम देता है। आपसी भाईचारे की डोर को मजबूत करता है। साथ ही इल्म हासिल करने पर जोर देता है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि इस्लाम के आदर्शों पर चलकर समाज व देश के विकास में योगदान दें। कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। ये बातें शुक्रवार देर शाम इमामबारगाह अकबरपुर में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मोहम्मद अब्बास ने कहीं।
उन्होंने कहा कि आखिरी रसूल हजरत मोहम्मद मुस्तफा का कहना था कि इल्म हासिल करने के लिए सात समंदर पार भी जाना पड़े तो पीछे न हटें। तालीम के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी जरूरी हैं। अच्छे संस्कार नहीं हैं तो तालीम कांटो भरा ताज है। आगे बढ़ने के लिए तालीम, तरबियत व तरक्की जरूरी है।
कहा कि इस्लाम ने सदैव इंसानियत का पैगाम दिया। यहां तक कहा गया कि नमाज पढ़ने के दौरान कोई मवेशी प्यास से मर रहा हो तो पहले उसे पानी पिलाओ। किसी की जान बचाना सबसे बड़ी इबादत है। मौलाना ने कहा कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ शहादत देकर संदेश दिया कि इंसानियत के लिए जान भी देनी पड़े तो जरूर दें। इमाम हुसैन ने शहादत न दी होती तो इंसानियत का नामोनिशान न होता। तकरीर के बाद कर्बला के शहीदों का विस्तार से जिक्र हुआ तो लोग भावुक हो गए।