नहरों की कटान व सिल्ट पटी होने से एक तरफ जहां किसान परेशान हैं वहीं दूसरी ओर इन्हीं कार्यों के लिए जिले को मिला दो करोड़ रुपये का बजट सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते लैप्स हो गया। इसके चलते जिले के किसान आज भी नहरों की कटान, सिंचाई की समस्या, नहरों में सिल्ट आदि परेशानियों से जूझ रहे हैं।
बताते चलें कि नहरों की साफ-सफाई, पेट्रोलिंग, बंद पड़े नलकूपों व सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कार्य करने के लिए शासन से वित्तीय वर्ष 2016-17 में दो करोड़ 18 लाख 72 हजार रुपये बजट आया था। इस धनराशि से सिंचाई विभाग को जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कार्य कराना था।
नहरों व माइनरों की सफाई व कटान रोकने के लिए पेट्रोलिंग, नहर पटरियों की मरम्मत, खराब राजकीय नलकूपों को दुरुस्त कराना, खेतों तक सिंचाई के लिए बनी नालियों की मरम्मत कराना व सूखे आदि की स्थिति में प्रभावित किसानों को समुचित व्यवस्था मुहैया कराने का निर्देश था।
मगर विभागीय उपेक्षा का आलम ये रहा कि साल भर किसान तमाम प्राकृतिक आपदाएं झेलते रहे और नहरों की कटान उनकी फसल बर्बाद करती रही। सूखे की स्थिति में माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंचने व राजकीय नलकूपों की बदहाली दूर कराने की जरूरत भी विभाग ने नहीं महसूस की।
बीते दिनों टांडा तहसील क्षेत्र में विभागीय उदासीनता के चलते शारदा सहायक नहर की पटरी टूट गई थी। यदि कर्मचारी नहर की पेट्रोलिंग करते तो शायद ये नौबत न आती। वहीं, कुछ माह पहले आलापुर तहसील में जहांगीरगंज रजबहा क्षतिग्रस्त हो गई थी। इससे भी किसानों को व्यापक नुकसान हुआ था।
शुकलहिया बनगांव माइनर, अरजानीपुर माइनर, जमुनीपुर माइनर बट्टूगढ़ माइनर व डड़वा सरैया माइनर आदि समेत अन्य कई माइनर सिल्ट से पटी पड़ी हैं। जबकि जिले भर में राजकीय नलकूपों की हकीकत भी किसी से छिपी नहीं है। इसके बाद भी संबंधित विभाग पूरे वर्ष मौन बना रहा।
कई बार तो प्रभावित किसानों ने जिला मुख्यालय व तहसील स्तर पर धरना-प्रदर्शन भी किया मगर इसके बाद भी संबंधित विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जिसके चलते शासन से मिली दो करोड़ 18 लाख 72 हजार रुपये की धनराशि से विभाग ने एक भी रुपया खर्च नहीं किया। ऐसे में आखिरकार बजट सरेंडर करना पड़ा।
एडीएम गिरिजेश कुमार त्यागी ने बताया कि, सिंचाई खंड टांडा को पूरी धनराशि दी गई थी। अधिशाषी अभियंता सिंचाई खंड ने अपने पत्र में बताया कि वित्तीय वर्ष में जिले में अच्छी बारिश होने के कारण धन का व्यय नहीं हो पाया। क्योंकि उक्त कार्ययोजना अवर्षण से निपटने के लिए तैयार की गई थी। ऐसे में पूरी धनराशि बिना आहरण के शासन को समर्पित कर दी गई है।