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आपात स्थिति में भगवान भरोसे लोग, नहीं मिलता थाना प्रभारियों का फोन

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अंबेडकरनगर। सीयूजी नंबर को लेकर सीएम की सख्ती के बावजूद जिले के पुलिस कर्मियों पर इसका असर नहीं है। आम आदमी किसी अपराध को लेकर थानों के पुलिस कर्मियों से आपात स्थिति में मदद लेना चाहे तो वह यहां मुमकिन नहीं हो पाता। बीएसएनएल के नेटवर्क की आड़ में अक्सर ज्यादातर थानाध्यक्ष अपने सीयूजी फोन को बंद किये रहते हैं। मनमानी इतनी ज्यादा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शाम पांच बजे करीब अगले आधे घंटे तक जब अलग-अलग 18 थानों में फोन किया गया तो 11 थाना प्रभारियों के फोन नॉट रिचेबल रहे तो वहीं महिला थाना प्रभारी का मोबाइल स्विच ऑफ था। यह हाल तब रहा जब बीएसएनएल अधिकारियों के अनुसार जिले के ज्यादातर क्षेत्रों में दूरसंचार टॉवर ठीक ढंग से काम कर रहे हैं।
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सीयूजी फोन का प्रयोग प्राथमिकता के साथ करने तथा उसे हमेशा जनहित में चालू रखने को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार कड़े निर्देश जारी कर रहे हैं। कोशिश यह है कि इससे आम नागरिकों को ज्यादा बेहतर सुविधा का एहसास कराया जा सके। एक दिन पहले ही बिजली विभाग के एक नवागत अवर अभियंता को इसलिए लखनऊ मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया, क्योंकि मुख्यालय से ही हुई जांच में उनका सीयूजी बंद पाया गया था। इन सबके बावजूद सबसे ज्यादा मनमानी जिले के थानों में सीयूजी को लेकर हो रही है। बीएसएनएल के खराब नेटवर्क की आम धारणा का फायदा उठाते हुए ज्यादातर थाना प्रभारी अपने फोन को या तो बंद रखते हैं या सिम के साथ वह सेटिंग कर देते हैं, जिसमें फोन नॉट रिचेबल या नेटवर्क के बाहर बताने लगता है।
उसी बीएसएनएल के सिम का प्रयोग कर रहे एसपी व एएसपी समेत पुलिस क्षेत्राधिकारियों से तो बात नियमित तौर पर हो जाती है, लेकिन बीएसएनएल के ही सिम का सीयूजी नंबर मिलाने पर थाना प्रभारियों से बात न हो पाना बड़ा सवाल खड़ा करता है। हकीकत परखने के लिए बुधवार को शाम पांच बजे से थाना प्रभारियों को एक-एक कर उनके सीयूजी पर फोन किया गया। 18 थानों में से सिर्फ छह थाना प्रभारियों से बात हो पायी। जिला मुख्यालय स्थित महिला थाने की प्रभारी का सीयूजी पांच बजकर 27 मिनट पर स्विच ऑफ मिला।
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थाना प्रभारियों के इस रवैये से निश्चित रूप से सुरक्षा व कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। तमाम नागरिकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अन्य विभागों की तरह सीयूजी फोन को लेकर लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारियों पर जब तक गाज नहीं गिरेगी तब तक इनकी मनमानी चलती रहेगी। उधर जब थाना प्रभारियों के फोन नॉट रिचेबल बता रहे थे तो अमर उजाला ने हकीकत परखने के लिए दूर संचार विभाग से संपर्क साधा। अभियंता राजेश ने बताया कि ज्यादातर क्षेत्रों में टॉवर ठीक ढंग से काम कर रहे हैं। नमूने के तौर पर उनसे पूछा गया तो उन्होंने आलापुर, भीटी, हंसवर तथा महरुआ में संबंधित दूर संचार के टावरों के पूरी तरह से काम करने की जानकारी दी। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीयूजी को लेकर थानों में किस तरह की मनमानी पसरी है।
इनसे हो पाई बात
अलीगंज, जहांगीरगंज, मालीपुर, राजेसुल्तानपुर व सम्मनपुर थाना तथा टांडा कोतवाली प्रभारी का सीयूजी फोन रिसीव हुआ। टांडा कोतवाल ने बताया कि एएसपी व सीओ टांडा आये हुए हैं। उनसे कुछ बिंदुओं पर चर्चा चल रही है। अन्य थानों के प्रभारियों से उनके क्षेत्र में कानून व शांति व्यवस्था के बारे में जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि अभी तक सब कुछ दुरुस्त चल रहा है।
इनके फोन बताते रहे नेटवर्क से बाहर
अहिरौली थाना प्रभारी का फोन 05:02 बजे, अकबरपुर कोतवाल का फोन 05:03 बजे, आलापुर कोतवाल का फोन 05:04, बसखारी थाना प्रभारी का फोन 05:07, बेवाना थाना प्रभारी का फोन 05:08, भीटी कोतवाल का फोन 05:10, हंसवर एसओ का फोन 05:11, जैतपुर एसओ का फोन 05:13, महरुआ एसओ का फोन 05:14, तथा जलालपुर कोतवाल का सीयूजी फोन 05:26 बजे आउट ऑफ नेटवर्क या फिर नॉट रिचेबल बताता रहा। इनमें से महरुआ थाना प्रभारी से ही दूसरे प्रयास में बात हो पायी।
थाना प्रभारियों से मांगे जायेंगे जवाब
पुलिस विभाग में सभी सीयूजी का बेहतर सदुपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। यह दिखवाया जायेगा कि किन परिस्थितियों में एक साथ इतने सीयूजी नंबर नॉट रिचेबल बताते रहे। सभी थाना प्रभारियों से इस बारे में बात करने के साथ ही उनसे जवाब लिया जायेगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो उस पर कार्रवाई भी होगी। -आलोक प्रियदर्शी, एसपी
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