दो स्पीड रडार मेें से एक है खराब, इंटरसेप्टर कार की भी है जरूरत
अंबेडकरनगर। नियमों को धता बताकर शहर की सड़कों पर फर्राटा भर रहे वाहनों की तेज रफ्तार जानलेवा साबित हो रही है। पिछले सात माह में विभिन्न कारणों से हुई दुर्घटनाओं में 120 लोगों को जान गंवानी पड़ी है। इस पर अंकुश लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस के पास वाहनों की रफ्तार
नापने के लिए पर्याप्त संसाधन ही नहीं है।
बढ़ते हादसों के बावजूद ट्रैफिक पुलिस के पास ओवर स्पीड करने वाले वाहनों की रफ्तार जांचने के लिए इंटरसेप्टर कार नहीं है। ट्रैफिक विभाग के पास महज दो स्पीड रडार हैं। इनमें से एक खराब है। ऐसे में खाली हाथ ट्रैफिक सिपाही कैसे तेज रफ्तार पर अंकुश लगा सकेंगे इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जुलाई तक कुल 184 सड़क दुघर्टनाएं हुई हैं। इनमें 120 लोग की मौत हो गई जबकि 99 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
जनवरी माह में 28 दुर्घटनाओं में 19 की मौत 12 घायल, फरवरी में 24 दुर्घटनाओं में 14 मौत 17 घायल , मार्च में 31 दुर्घटनाओं में 23 मौत 10 घायल, अप्रैल माह में 37 दुर्घटनाओं में 29 मौत 12 घायल, मई में 29 दुर्घटनाओं में 18 की मौत 18 घायल, जून में 27 दुर्घटनाओं में 11 की मौत व 29 लोग घायल जबकि जुलाई माह में आठ दुर्घटनाओं में छह की मौत दो लोग घायल हुए हैं। संवाद
निदेशालय भेजा गया पत्र
सीओ ट्रैफिक ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान समय समय पर चलाया जाता है । उपकरणों में बढ़ोत्तरी के लिए निदेशालय को समय समय पर पत्र भेजा गया है। फिलहाल मौजूदा संसाधनों से पूरे जिले की यातायात व्यवस्था सुचारु ढंग से चल रही है। -देवेंद्र कुमार मौर्य, सीओ ट्रैफिक