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कैसे भर्ती हों मरीज, बिजली गुल होते ही छा जाता अंधेरा

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अंबेडकरनगर। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा जिले में कागजी साबित हो रहा है। इसका अंदाजा इसी से दिखता है कि शाम ढलने के बाद बिजली गुल हो जाने पर सीएचसी व पीएचसी में अंधेरा छा जाता है। ऐसे में नए मरीजों को भर्ती करने व भर्ती मरीजों की देखभाल में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। लापरवाही के चलते बीते कई माह से सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को जनरेटर चलाने के लिए डीजल खरीद का बजट ही नही मिल रहा है।
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इसके साथ ही बजट के अभाव में अधिकांश सीएचसी व पीएचसी के वार्डों की साफ सफाई भगवान भरोसे चल रही है। इतना ही नहीं मरम्मत व देखभाल न होने से वार्डों में पड़े बेड भी बदहाल और खस्ताहाल स्थिति में हैं। इतना ही नहीं जरूरी दवाओं का टोटा भी मरीजों की परेशानी बढ़ा रहा है। इसके चलते ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने से यहां संचालित व्यवस्थाएं भी पटरी से उतर रही हैं।
बीते दिनों डीएम सैमुअल पॉल एन ने निर्देश दिया था कि सीएचसी व पीएचसी पर ही संबंधित इलाके के मरीजों का उपचार व भर्ती सुनिश्चित की जाए। ऐसे मरीजों को यहां से जरूरी होने पर ही जिला अस्पताल रेफर किया जाए। साथ ही सीएमओ और सभी सीएचसी-पीएचसी प्रभारी प्राथमिकता के आधार पर अस्पतालों में मरीजों के लिए सभी जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए।
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इसका अनुपालन न होने से सीएचसी व पीएचसी में मरीजों को रात के समय भर्ती न कर इलाज के लिए जिला अस्पताल रिफर कर दिया जा रहा है। अकबरपुर सीएचसी के लिए मार्च माह से डीजल का भुगतान नहीं मिला है तो वहीं सीएचसी भीटी में जनवरी माह से डीजल के लिए कोई रकम नहीं मिली है।
अधिकांश सीएचसी पर डीजल का बजट न मिलने से रात में बिजली गुल होते ही पूरा अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब जाता है। कुछ देर में बत्ती आ जाती है तो ठीक नहीं तो इनवर्टर भी जल्द ही जवाब दे देता है। इसके बाद सीएचसी व पीएचसी में छाए अंधेरे के कारण आने वाले मरीजों का परीक्षण किए बिना स्टाफ द्वारा जिला अस्पताल भेज दिया जाता है।
सफाई के साथ ही दवाओं का भी टोटा
सीएचसी व पीएचसी के वार्डों में साफ सफाई की व्यवस्था भी बदहाल है। न तो वार्डों में प्रतिदिन झाड़ूू पोछा होता है और न ही भर्ती मरीजों के बेड की चादर ही बदली जाती है। देखभाल न होने से वार्डों के तमाम बेड ऐसी जर्जर स्थिति में पड़े हैं, इनसे मरीज के गिरने की आशंका बनी रहती है। इन स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं के साथ ही चिकित्सकों का भी टोटा है। नगपुर सीएचसी में एनेस्थीसिया के चिकित्सक के साथ ही नेत्र रोग, हड्डी रोग व बाल रोग के डॉक्टर भी तैनात नहीं है। अल्ट्रासाउंड से लेकर अन्य जांच सुविधा न मिल पाने के कारण ही मरीज यहां आने से बेहतर जिला अस्पताल पहुंचना बेहतर मानते हैं।
सभी सीएचसी व पीएचसी में मरीजों को भर्ती करने पर विशेष तौर पर जोर दिया जा रहा है। अभी भी मरीजों को भर्ती तो किया जा रहा है लेकिन इनकी संख्या काफी कम है। इसे और बढ़ाने के साथ ही रात में डीजल की कमी से होने वाली परेशानी को भी जल्द ही दूर कराने का पूरा प्रयास किया जाएगा। ताकि जिला अस्पताल में होने वाली मरीजों की भीड़ को कम किया जा सके।
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डॉ. श्रीकांत शर्मा, सीएमओ
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