एकमात्र महिला चिकित्सालय की स्थापना जलालपुर में वर्ष 2007-08 में कराई गई। तब से यह अस्पताल किराए के चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ के सहारे चल रहा है। यहां जिन महिला चिकित्सकों व अन्य स्टाफ की तैनाती की गई है, दरअसल वे सभी नगरपुर सीएचसी में तैनात हैं।
ऐसे में जब नगपुर सीएचसी में महिला मरीज आती हैं तो उन्हें लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित महिला अस्पताल भेज दिया जाता है। इससे महिला मरीजों व उनके तीमारदारों को व्यापक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महिला अस्पताल में भी कई महत्वपूर्ण सुविधाओं की दरकार बनी हुई है।
जलालपुर नगर में 30 बेड के महिला अस्पताल की स्थापना का निर्णय शासन ने लिया था। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से महिला अस्पताल का निर्माण कार्य वर्ष 2007 में पूर्ण हो गया। इसके साथ ही नगपुर सीएचसी में तैनात महिला चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ को महिला चिकित्सालय से संबद्ध कर दिया गया।
प्रदेश की सत्ता बदली तो महिला अस्पताल की उपेक्षा शुरू हो गई। अस्पताल में महिला चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की सुध शासन को नहीं रही। इस बीच प्रदेश की सत्ता पर फिर सपा का कब्जा हुआ तो लोगों को उम्मीद हुई कि अब महिला अस्पताल के दिन बहुरेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
सीएचसी नगपुर में तैनात महिला डॉ. मोहसिना, डॉ. अलका यादव, डॉ. शशिबाला, फार्मासिस्ट उमाकांत, लैब टेक्नीशियन चंद्रभान यादव, कांउसलर शमीम अहमद, स्टाफ नर्स विभा यादव, दीपिका यादव, वार्ड आया आशा देवी व काउंसलर सरिता को महिला अस्पताल से संबद्ध किया गया है।
नतीजा यह है कि जब कोई महिला मरीज नगपुर सीएचसी जाती है तो उसे महिला अस्पताल भेज दिया जाता है। ऐसे में मरीजों व उनके तीमारदारों को लगभग दो किमी की दूरी तय कर महिला अस्पताल जाना पड़ता है।
इधर महिला अस्पताल परिसर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। परिसर से लेकर वार्ड तक गंदगी का अंबार है तो परिसर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप लंबे समय से दूषित पानी उगल रहा है। पेयजल के लिए लगा वाटर कूलर साल भर से खराब पड़ा है।
वाटर सप्लाई के लिए पानी की टंकी का निर्माण तो किया गया है लेकिन उसे अब तक प्रारंभ नहीं किया जा सका है। अल्ट्रासाउंड व ईसीजी जैसी महत्वपूर्ण सुविधा यहां महिला मरीजों को उपलब्ध नहीं है। इसके लिए उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।