अंबेडकरनगर। 90 करोड़ रुपये की लागत से टांडा में बने मातृ एवं शिशु चिकित्सालय का वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन हैरत की बात यह है कि महिला एवं शिशु रोग के लिए स्पेशलाइज्ड अस्पताल में दोनों विशेषज्ञों का एक भी पद नहीं भरा जा सका है। गर्भवती महिलाओं का इलाज सीएचसी के डॉ. रंजीत वर्मा कर रहे हैं तो बच्चों के सेहत का जिम्मा सीएचसी के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमणि संभाल रहे हैं।
टांडा में सपा सरकार में एमसीएच विंग की स्थापना की स्वीकृति मिली थी। साल 2018 में इसका निर्माण पूरा होते-होते भाजपा की सरकार बन गई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से एक साथ पांच अस्पतालों का उद्घाटन किया था, जिसमें यह भी शामिल था। लगभग 90 करोड़ के बजट से बनी यह बहुमंजिला इमारत बड़े शहरों के अस्पतालों को टक्कर दे रही है। इस मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में वैसे तो सभी संसाधन हैं, लेकिन उनके संचालन के लिए कोई नहीं है।
यहां पर चिकित्सकों से लेकर सभी स्टाफ की कमी है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को देखते हुए बीते साल दो चिकित्सकों की तैनाती की हुई थी, लेकिन उनमें से किसी ने भी जॉइन नहीं किया, जिससे कमी को पूरा नहीं किया जा सका। मौजूदा समय में सीएचसी के दो चिकित्सकों के सहारे जैसे तैसे व्यवस्थाएं संचालित हो रही हैं। इनके अलावा यहां सिर्फ दो एनेस्थेटिस्ट ही हैं।
रोजाना होती है 200 से 300 की ओपीडी
टांडा में स्थित मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में रोजाना 200 से 300 की ओपीडी होती है। वहीं चार से पांच प्रसव भी होते हैं। नगर पालिका टांडा की आबादी लगभग दो लाख है ऐसे में लोगों को इलाज के लिए यहीं सबसे नजदीक अस्पताल है जहां पर मरीजों की भीड़ रहती है। हाल ही में सीएमओ ने सीएचसी में होने वाले प्रसव पर रोक लगाते हुए उन्हें एमसीएच में कराने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद अब यहां पर प्रसव के लिए प्रसूताओं की संख्या बढ़ेगी।
पदवार स्थिति
स्त्री रोग विशेषज्ञ : स्वीकृत पद - 6, तैनाती - 0
बाल रोग विशेषज्ञ: स्वीकृत पद - 6, तैनाती - 0
ईएमओ: स्वीकृत पद - 12, तैनाती - 0
रेडियोलॉजिस्ट: स्वीकृत पद - 2, तैनाती - 0
पैथोलॉजिस्ट: स्वीकृत पद - 3, तैनाती - 0
नर्सिंग सिस्टर: स्वीकृत पद - 8, तैनाती - 0
स्टाफ नर्स: स्वीकृत पद -54, तैनाती - 25
नियोनेटोलॉजी नर्स: स्वीकृत पद - 12 , तैनाती - 0
हॉस्पिटल मैनेजर: स्वीकृत पद - 1, तैनाती - 0
अस्पताल में चिकित्सकों से लेकर अन्य स्टाफ की कमी है, लेकिन फिर भी मरीजों को कम संसाधनों में भी बेहतर सुविधा देना का प्रयास रहता है। अस्पताल में स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए कई बार अधिकारियों से अवगत भी कराया जा चुका है।
- डॉ. अरविंद कुमार राय, सीएमएस