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Ambedkar Nagar News: होली के पकवानों की खुशबू से महक रहे घर-आंगन

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अरियौना में घर की छत पर पापड़ बनाती महिलाएं।
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अंबेडकरनगर। होली का पर्व नजदीक आते ही घर-आंगन पकवानों की खुशबू से महक उठे हैं। महिलाएं कई दिन पहले से ही तैयारियों में जुट गई हैं। पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ अब बाजार से चिप्स-पापड़ और अन्य सामग्री भी खरीदी जा रही है। नौकरीपेशा महिलाओं के लिए दफ्तर और घर की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन त्योहार को लेकर उनका उत्साह देखते ही बन रहा है।
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पहले भगवान को अर्पित होते थे गुलगुले
प्रधानाचार्य जया सिंह बताती हैं कि पहले उनकी सास गेहूं के आटे से गुलगुले बनाती थीं और उन्हें सबसे पहले भगवान को अर्पित किया जाता था। समय के साथ यह परंपरा कुछ बदली है। अब लोग कम मात्रा में गुलगुले बनाकर रस्म निभाते हैं। नई पीढ़ी के बच्चे साउथ इंडियन डिश, दही बड़ा और चाट जैसी चीजें पसंद करने लगे हैं, जिससे पकवानों की सूची भी बदल रही है।


गुझिया की परंपरा अब भी कायम

प्रधानाचार्य डॉ. स्नेहलता वर्मा कहती हैं कि गुझिया बनाने की परंपरा आज भी घरों में जीवित है। हालांकि अब खोवा बाजार से खरीदा जाता है, लेकिन गुझिया बनाने का उत्साह पहले जैसा ही है। विद्यालय से लौटने के बाद वह रात में परिवार के साथ मिलकर चिप्स और पापड़ भी तैयार करती हैं। उनका मानना है कि ऐसे अवसर परिवार में एकजुटता बढ़ाते हैं और परंपराएं जीवित रखते हैं।
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बदलती परंपराएं, पर शुद्धता पर जोर

शिक्षिका रजनी यादव के अनुसार समयाभाव के कारण लोग बाजार से तैयार सामग्री खरीदने लगे हैं। व्यस्त जीवनशैली के बावजूद घर में बनने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। आलू, चावल और सोयाबीन के चिप्स आज भी कई घरों में बनाए जाते हैं।



पुराने पकवान पीछे छूटते जा रहे

प्रधानाचार्य रंजना बताती हैं कि कुछ पारंपरिक पकवान अब कम बनने लगे हैं। फिर भी बुजुर्गों से विधि पूछकर उन्हें बनाने का प्रयास किया जाता है, ताकि नई पीढ़ी को उनकी जानकारी रहे। बच्चों की पसंद के अनुसार नए व्यंजन भी शामिल किए जा रहे हैं।



हर्बल गुलाल और फूलों की होली पर जोर

शहजादपुर की कोमल गुप्ता कहती हैं कि होली रंग, मस्ती और खुशी का पर्व है, लेकिन इसके नाम पर फूहड़ता नहीं होनी चाहिए। फूहड़ गीतों, शराब और नशे से दूर रहकर हर्बल-ऑर्गेनिक गुलाल और फूलों की होली खेलनी चाहिए, ताकि त्योहार की गरिमा बनी रहे।
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