पटेलनगर स्थित एसबीआई के एटीएम पर शनिवार को लगी लंबी कतार।
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जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक एटीएम व्यवस्था पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही है। बैंकों की बंदी के बीच एटीएम के भी दगा दे जाने से उपभोक्ताओं को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लोग एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाते नजर आए। गौरतलब है कि जिले में एटीएम व्यवस्था पहले से ही सुचारु ढंग से नहीं चल पा रही थी।
बैंक शाखाओं में छुट्टी के बीच एटीएम पर धन-निकासी का दबाव बढ़ जाता है। पूर्व से ही एटीएम उपभोक्ताओं को ऐसे में दगा दे जाते थे। इस बीच 8 नवंबर से नोटबंदी के फैसले ने जिले की एटीएम व्यवस्था को और लचर कर दिया है।
एटीएम से लेकर बैंक शाखाओं तक लोग धन-निकासी के लिए उमड़ रहे हैं। बैंक शाखाओं के खुले रहने पर तो कुछ हद तक राहत रहती है लेकिन बंद होने पर एटीएम पर दबाव बढ़ जाता है। यह बात अलग है कि नोट बंदी के बाद से जिला मुख्यालय पर स्थापित दो दर्जन से अधिक एटीएम में से महज दो से तीन का ही संचालन हो पाता है।
ये एटीएम भी उपभोक्ताओं का ज्यादा देर साथ नहीं दे पाते हैं। ऐसे में कई बार एक-एक एक एटीएम पर 300 से 400 की संख्या में लोगों की लाइन लग जाती है। शनिवार को भी बैंकों में अवकाश के बीच एटीएम पर दबाव दिखा।
एटीएम के संचालन की स्थिति यह रही कि जिला मुख्यालय पर महज दो एटीएम का संचालन हुआ। इस पर धन-निकासी के लिए उपभोक्ताओं को तीन से चार घंटे लाइन में लगना पड़ा। इतनी देर लाइन में खड़े होने के बाद भी लोगों को मिले सिर्फ दो हजार रुपए।
यही नहीं टांडा व जलालपुर की हालत और भी बदतर रही। यहां पर सिर्फ एक-एक एटीएम का संचालन हुआ। इससे एटीएम पर लंबी लाइन दिखी। रविवार को भी बैंकों में अवकाश है। ऐसे में उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ी हुई हैं। उपभोक्ता राजेश तिवारी का कहना है कि जब अवकाश के पहले ही दिन ज्यादातर एटीएम से धन-निकासी नहीं हो सकी।