अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति 2015 में चयन के बाद से इंटरमीडिएट के छात्र हिमांशु मिश्र की सोच व जज्बे दोनों में आए परिवर्तन ने परिवारीजनों की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं। हिमांशु के अनुसार अब उसे जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने का सुनहरा अवसर मिला है।
वहीं माता-पिता व इकलौती बहन के अनुसार हिमांशु को 30 हजार की छात्रवृत्ति का चेक मिलने से पढ़ाई में आर्थिक संकट तो दूर हुआ ही, उसका मनोबल भी ऊंचा हुआ है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने प्रदेश के मेधावियों का मनोबल बढ़ाने व आर्थिक संकट दूर करने के लिए गत वर्ष छात्रवृत्ति परीक्षा आयोजित की थी।
उसमें अकबरपुर तहसील अंतर्गत खेंवार ग्राम पंचायत के जैनपुर पंडित पूरा निवासी हाईस्कूल के छात्र हिमांशु मिश्र का चयन हुआ था, उसे 30 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलनी थी। 10 फरवरी 2016 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उसे उपरोक्त राशि का चेक सौंपा गया। चेक मिलने व इस दौरान हुए सम्मान से हिमांशु समेत पूरा परिवार अत्यंत प्रसन्न है।
यह उसके अब तक के जीवन का एक ऐसा टर्निंग प्वाइंट बना जिसने पूरे परिवार की खुशियों को एक नया मुकाम दिया है। छात्रवृत्ति से हिमांशु की शिक्षा पर क्या सकारात्मक असर पड़ा यह जानने के लिए अमर उजाला टीम रविवार को उसके गांव पहुंची।
वहां हिमांशु तो नहीं मिला लेकिन उसके पिता नरेंद्र मिश्र के अलावा मां मिथिलेश, बहन सुचिता व दादी विद्या ने बताया कि जब से हिमांशु को छात्रवृत्ति के लिए सम्मानित किया गया है, उसका नजरिया ही बदल गया है।
पिता ने कहा कि अमर उजाला ने छात्रवृत्ति देने के लिए जिस सम्मानित ढंग से बुुलाया और उम्मीद से ज्यादा सम्मान दिया, उसने हिमांशु के जीवन में एक बड़ा लक्ष्य तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। हिमांशु का लक्ष्य जीवन में सफलता के ऊंचे मुकाम पर पहुंचना है।
बीएससी की शिक्षा पूरी कर चुकी बड़ी बहन सुचिता ने कहा कि जिस तरह से हिमांशु का नजरिया बदला है, वह उसे काफी आगे ले जाएगा। और ऐसा तय करने में अमर उजाला परिवार की भूमिका पूरी जिंदगी कभी भुलाई नहीं जा सकेगी। भावुक हुई मां मिथिलेश ने कहा कि हिमांशु अब पढ़ाई को लेकर इतना गंभीर है कि वह गोरखपुर में अपने चाचा के साथ ही रहकर कई विषयों की कोचिंग कर रहा है।
यूं तो वह कक्षा 11 में रामदेव जनता इंटर कॉलेज का छात्र है लेकिन वह जीवन में ऊंची छलांग लगाने और सपनों जैसी जगहों पर पहुंचने के लिए ही कोचिंग करने के लिए गोरखपुर गया है। एक मात्र लाडले को आंखों से दूर रखना परिवार के लिए निश्चित तौर पर कठिन है लेकिन बेहतर जिंदगी के लिए अब सोच व जोश दोनों बदल चुका है।