अंबेडकरनगर। अतरौला निवासी अजय कुमार की जेल में हुई संदिग्ध मौत मामले में हाईकोर्ट ने तत्कालीन एसडीएम भीटी सदानंद सरोज की अपील पर सुनवाई करते हुए उन्हें राहत दी है। मामले में जेल अधीक्षक, एसओ महरुआ समेत तीन आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के सीजेएम कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने पीड़ित पक्ष को न्यायिक जांच रिपोर्ट के साथ एसडीएम के विरुद्ध लापरवाही पर कार्रवाई के लिए शासन में शिकायत करने की छूट दी। एसडीएम वर्तमान में शाहजहांपुर में तैनात हैं।
अजय कुमार की मां शिवकुमारी ने 20 अप्रैल 2025 को हत्या का आरोप लगाते हुए न्यायालय से कार्रवाई की गुहार लगाई थी। इसमें अनिल कुमार, निवासी चपरा महमदपुर के अलावा एसओ महरुआ, एसडीएम भीटी व जेल अधीक्षक को प्रतिवादी बनाया था। मामले में सीजेएम कोर्ट ने 10 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए थे।
तत्कालीन एसडीएम सदानंद सरोज ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसकी सुनवाई कोर्ट नंबर 14 में न्यायाधीश राजीव सिंह ने की। एसडीएम ने पुलिस चालानी रिपोर्ट और जमानत बंध प्रस्तुत न करने पर न्यायिक हिरासत में भेजने की बात कही। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता की ओर से मनगढ़ंत चालानी रिपोर्ट, मेडिको लीगल बनाने की बात कही गई।
जेल में दी गई प्रताड़ना पर साक्ष्य प्रस्तुत किए। तर्क दिया कि एसडीएम ने बिना किसी ठोस आधार के जेल भेजा और मौत के बाद जमीन का पट्टा देकर प्रलोभन देने का प्रयास भी किया। एसडीएम ने लापरवाही की, लेकिन न्यायिक जांच में जेल अधिकारियों की प्रताड़ना पाई गई। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि सीजेएम के आदेश पर एसडीएम को छोड़कर अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए।
ये है पूरा मामला
शिवकुमारी के मुताबिक उनके बेटे अजय की 28 मार्च 2025 की रात अनिल कुमार से कहासुनी हुई थी, जिसकी रिकॉर्डिंग दूसरे दिन अनिल ने वायरल कर दी। वायरल ऑडियो के आधार पर 29 मार्च को अजय को पुलिस ने एसडीएम भीटी की कोर्ट में पेश किया, जहां से अजय काे जेल भेज दिया गया था। 30 जनवरी की शाम अजय को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। मृतक के कान व नाक से रक्तस्राव हो रहा था। साथ ही सिर पर भी चोट के निशान मिले थे।