आसमान में छाई धुंध ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। कारण यह कि इन दिनों रबी की फसलों की बुआई का कार्य प्रारंभ हो गया है। जिनके खेतों में नमी है, उन्होंने बुआई शुरू कर दी है, जबकि कुछ किसान खेत को तैयार करने के लिए सिंचाई कर रहे हैं।
किसानों का मानना है कि यदि इसी प्रकार से आसमान में धुंध छाई रही, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव रबी की फसलों पर पड़ सकता है। न सिर्फ बुआई के कार्य में विलंब होगा, बल्कि फसलों की पैदावार पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मौसम में अचानक आए बदलाव एवं प्रदूषण के चलते आसमान में छाई धुंध से किसानों के हृदय की धड़कनें बढ़ गई हैं। धान की बेहतर फसल होने के बाद किसानों की उम्मीदें रबी की फसल से भी बढ़ गई हैं।
उन्हें उम्मीद थी कि जिस प्रकार से भगवान की खरीफ की फसल पर कृपा रही, उसी प्रकार से रबी की फसल पर भी रहेगी। हालांकि नवंबर के प्रथम सप्ताह में ही मौसम ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया। इसे मौसम में बदलाव कहा जाए या फिर बढ़ते प्रदूषण का असर, समय से पहले ही आसमान में धुंध छाने लगी।
वैसे तो सुबह के समय धुंध अधिक होती है, लेकिन दिन में भी हल्की धुंध छाई रहती है। ऐसे में इसका प्रतिकूल प्रभाव रबी की फसल पर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। दरअसल इन दिनों रबी की फसल मटर, सरसों, उरद, गेहूं, आलू, चना, मूंग आदि की फसलों की बुआई का कार्य जिले में प्रारंभ हो गया है।
जिन किसानों के खेत में नमी है, उन्होंने बुआई कर दी, जबकि कुछ किसान बुआई के लिए खेत तैयार करने में लगे हुए हैं। कुछ क्षेत्रों में सरसों के छोटे-छोटे पौधे भी उग आए हैं। ऐसे में मौसम में आए बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भीटी के किसान रामबख्श सिंह व नरसिंह तिवारी ने कहा कि इसी प्रकार से आगे भी मौसम रहा, तो फसल प्रभावित होगी।