टांडा के परसाई कला में श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर रविवार को हवन-यज्ञ करते श्रद्धालु।
बसखारी(अंबेडकरनगर)। टांडा के परसाई कला में श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को हवन-यज्ञ के साथ समापन किया गया। प्रवाचक आचार्य अनूप बाजपेयी ने बताया कि यज्ञ की पूर्णाहुति बिना हवन के अधूरी मानी जाती है। हवन को देवताओं का मुख कहा गया है और इसमें डाली गई आहुतियां वायुमंडल में छोटे-छोटे परमाणुओं के रूप में बिखरती हैं।
इससे न केवल वातावरण शुद्ध होता है, बल्कि यज्ञ में भाग लेने वाले लोगों को उसके समग्र फल की प्राप्ति होती है। हवन में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हवन के माध्यम से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यज्ञ और हवन का मूल उद्देश्य व्यक्ति को आध्यात्मिक दृष्टि से सशक्त बनाना है। हवन में डाली गई आहुतियां केवल अग्नि को नहीं जातीं, बल्कि व्यक्ति के अंदर नकारात्मक ऊर्जा का नाश कर सकारात्मक भावनाओं का संचार करती हैं। जीवन में भक्ति, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति की मानसिकता और आचरण में सुधार होता है। हवन का फल केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक लाभ भी प्रदान करता है। इस दौरान लालबिहारी तिवारी, रामरक्षा, जितेंद्र उपाध्याय, रामआशीष तिवारी, अनिल तिवारी, सिद्धार्थ तिवारी व अन्य उपस्थित रहे।