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Ground Report Ambedkarnagar : बदले समीकरण लेंगे सबका इम्तिहान, त्रिकोणीय हो गई है लड़ाई

Wed, 22 May 2024 06:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा अंबेडकरनगर, अक्षय कुमार

सार

करीब ढाई लाख मुस्लिम मतदाताओं को देखते हुए उसने कमर हयात को मैदान में उतारा है, जो लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं।
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लोकसभा चुनाव 2024 सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंबेडकरनगर में इस बार समीकरण बदले हुए हैं। बसपा के सांसद रितेश पांडेय पाला बदलकर भगवा खेमे में आ चुके हैं। बसपा शासनकाल में मंत्री रहे और वर्तमान में यहीं की कटेहरी विधानसभा सीट से विधायक लालजी वर्मा साइकिल पर सवार होकर मैदान में उतरे हैं। वहीं, ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाकर दो बार जीत का स्वाद चख चुकी बसपा ने इस बार मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव लगाया है। करीब ढाई लाख मुस्लिम मतदाताओं को देखते हुए उसने कमर हयात को मैदान में उतारा है, जो लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं।

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चुनावी माहौल और मिजाज की बात करें उससे पहले इस सीट के इतिहास और भूगोल को समझना जरूरी है। अयोध्या से 1995 में काटकर अंबेडकरनगर जिला बनाया गया। इसके बाद भी यह अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र का ही हिस्सा रहा। परिसीमन के बाद 2009 में अंबेडकरनगर सीट अस्तित्व में आई। इस सीट में अयोध्या का गोसाईंगंज विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है। इस सबका जिक्र इसलिए क्योंकि यहां मतदाताओं के बीच राममंदिर के निर्माण का असर स्पष्ट रूप से दिखता है।

जातीय समीकरणों की ताकत को अगर समझना है तो इस सीट के इतिहास में जाना होगा। दलित बहुल इस सीट पर 2009 में हुए पहले चुनाव में बसपा की सोशल इंजीनियरिंग का पूरा असर दिखा। बसपा से उतरे राकेश पांडेय ने 32 फीसदी वोट शेयर हासिल कर सीट को बसपा की झोली में डाल दी। सपा से मैदान में उतरे शंखलाल माझी, तो भाजपा के विनय कटियार तीसरे स्थान पर खिसक गए थे। पर, 2014 के मोदी लहर में भाजपा के हरिओम पांडेय ने दम दिखाया और बसपा के राकेश पांडेय से सीट छीन ली। हालांकि 2019 में बसपा की सोशल इंजीनियरिंग फिर काम की। हाथी पर सवार होकर मैदान में आए रितेश पांडेय ने भाजपा के मुकुट बिहारी को 95,880 मतों से शिकस्त देकर फिर से सीट बसपा की झोली में डाल दी।
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रोचक तथ्य यह भी है कि यहां की पांचों विधानसभा सीटें सपा ने जीतीं, पर उसके दो विधायक भाजपा के पक्ष में हैं। ऐसे में यहां बसपा के पूर्व और वर्तमान नेताओं के बीच मुकाबला काफी रोचक है। बदले हुए हालात में बसपा के लिए जीत दोहराना बड़ी चुनौती है। भाजपा के लिए सुकून की बात है कि राममंदिर निर्माण और कानून-व्यवस्था की चर्चा लोगों की जुबां पर है। पर, रोजगार, महंगाई को लेकर परेशान करने वाले सवाल भी हैं। हालांकि जीत-हार का फैसला जातीय गोलबंदी पर ही होगा।

इस बार के योद्धा

  • रितेश पांडेय, भाजपा : 2019 में बसपा से सांसद बने। इससे पहले बसपा के टिकट पर जलालपुर से विधायक चुने गए थे। विधायक रहते ही बसपा ने लोकसभा का टिकट दिया। पिता राकेश पांडेय पिछले विधानसभा चुनाव में सपा से जलालपुर से विधायक चुने गए। उन्होंने राज्यसभा सदस्य के चुनाव में सपा से बगावत कर दी।
  • लालजी वर्मा, सपा : कटेहरी सीट से विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा में शामिल हुए थे। पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी भी सौंप रखी है। कभी बसपा प्रमुख मायावती के खास रहे लालजी संसदीय कार्य मंत्री रहने के अलावा कई और विभाग भी संभाल चुके हैं।
  • कमर हयात, बसपा : मूलतः जलालपुर से निकाय की राजनीति करते रहे हैं। जलालपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष रह चुके हैं जबकि पत्नी फरजाना खातून भी अध्यक्ष रह चुकी हैं। बसपा ने यहां पहले किछौछा के कलाम शाह को टिकट दिया था लेकिन बाद में टिकट काटकर कमर हयात को थमा दिया।

रामधुन और विकास के बीच महंगाई, बेरोजगारी भी मुद्दा
हे राम लला कृपा करो, जब आई अगले साल, बनी विधायक, आई अवध में लागल प्रोटोकाॅल..... अयोध्या से अंबेडकरनगर जिले में प्रवेश करते ही मया बाजार (गोसाईंगंज) में एक मिठाई की दुकान पर चल रहा यह गाना बरबस ही लोगों को आकर्षित कर रहा था। गाना सुनकर हम भी रुक लिए। अंदर इस धुन के साथ चुनावी चर्चा तेज थी। राजकुमार बोले, इस बार राम के नाम पर वोट पड़ेगा। ऋषि भी हां में हां मिलाते हैं। हालांकि वह यह भी जोड़ते हैं कि भ्रष्टाचार और अपराध पर भी लगाम लगा है। अरुण यादव बोले, इस बार बिरादरी के वोट भाजपा के साथ हैं। राजकुमार ने छुट्टा पशु और पक्के मकान का मुद्दा उठाया। पवन पांडेय बोले, बुनकर भी खुश हैं, 18 घंटे बिजली मिल रही है। हालांकि, महंगाई और बेरोजगारी पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

कानून-व्यवस्था, लाभार्थी योजनाओं की चर्चा
कटेहरी में प्रवेश करते ही अयोध्या, वाराणसी के फोरलेन का काम तेजी से चल रहा है। एक कपड़े की दुकान पर रुके तब तक सपा की झंडा लगी कई गाड़ियां निकलीं। पूछने पर व्यापारी पंकज बोले, शिव बाबा के पास अखिलेश की जनसभा है। चुनाव में कड़ा मुकाबला है, लेकिन व्यापारी भाजपा के साथ है। सांसद, विधायक तो कुछ नहीं किए, लेकिन सरकार काम कर रही है। बुजुर्ग आशाराम बोले, अब चोरी-छिनैती तो नहीं होती है। राशन मिल रहा है, विकास हो रहा है। और क्या चाहिए? राम प्रसाद बोले, लेखाजोखा में  व्यापारियों को थोड़ी राहत दी जानी चाहिए। मटरू राम बोले, जिले में कृषि कॉलेज, हॉस्पिटल सब बसपा सरकार में बना। इस बार भी लड़ाई कड़ी होगी।

पक्ष-विपक्ष में खूब दलीलें
अकबरपुर के पटेलनगर चौराहे पर मिले बृजेश यादव बोले, इस बार कहीं कोई लहर नहीं है। सुरेंद्र का मानना है कि लड़ाई सपा, भाजपा के बीच है। विकास सिंह कहते हैं, बेरोजगारी बढ़ी है, शिक्षा महंगी हो गई, प्राइमरी में काफी समय से भर्ती नहीं हुई।  

  • जलालपुर के महिला अस्पताल के पास मिले राम सुमेर का मानना है कि चुनाव जाति पर लड़ा जा रहा है। राममंदिर और अनुच्छेद 370 हटने की चर्चा लोगों में है, तो सांसद का व्यवहार और काम भी है। ओम प्रकाश कहते हैं, राशन, काॅलोनी, सम्मान निधि, बसपा के वोटबैंक में सेंध लगा रही है। जाफराबाद और मुस्लिम बस्तियों में भी सांसद ने काम कराया, वहां के लोग भी उनके साथ हैं। 

युवाओं में रोजगार का सवाल
टांडा के बसखारी में मिले सूर्य भूषण त्रिपाठी कहते हैं, मायावती की ढिलाई से यहां सपा, भाजपा के बीच सीधी लड़ाई है। अरुण मिश्रा इसे आैर साफ करते हुए कहते हैं, यह सब बसपा के प्रत्याशी बदलने और देर से देने की वजह से है। सत्य नारायण अग्रहरि कहते हैं, महंगाई बढ़ी है। रोजगार है नहीं, युवा नाराज हैं। इसका असर चुनाव में दिखेगा। 

जातीय समीकरण

  • दलित 23.44%
  • मुस्लिम 13.41%
  • कुर्मी 8.79%
  • ब्राह्मण 8.47 %
  • निषाद 7.29 %
  • यादव 7.24%
  • राजभर 6.28 %
  • क्षत्रिय 4.61%
  • वैश्य 4.61%

(अनुमानित आंकड़े) 

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