अभियान के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई गई। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2015 में चलाए गए अभियान में मात्र चार लाख 66 हजार 800 रुपये की ही वसूली की जा सकी। नतीजा यह रहा कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में धड़ल्ले से अवैध कटान जारी है।
पर्यावरण संतुलन के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाए जाने एवं हरे पेड़ों की कटान पर अंकुश लगाने को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा तमाम दिशा- निर्देश तो दिए जाते हैं, लेकिन इसके पालन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है।
तमाम शिकायतों के बाद यदि अभियान चलाया भी, तो वह महज औपचारिकता तक ही सीमित रहा। इसी का नतीजा रहा कि जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में आए दिन बड़े पैमाने पर ठेकेदारों द्वारा बगैर परमिट के ही हरे पेड़ों की धड़ल्ले से कटान की जा रही है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 के जनवरी माह में अवैध कटान के दौरान छापेमारी कर 51 हजार 100 जुर्माना वसूला गया। इसी प्रकार फरवरी माह में 58 हजार 300 रुपये, मार्च माह में 53 हजार 300 रुपये, अप्रैल माह में 56 हजार रुपये, मई माह में 13 हजार रुपये वसूले गए।
जून माह में 39 हजार 600 रुपये, जुलाई माह में 28 हजार रुपये, अगस्त माह में 43 हजार रुपये, सितंबर माह में पांच हजार रुपये, अक्तूबर माह में 47 हजार 500 रुपये, नवंबर माह में नौ हजार पांच सौ रुपये व दिसंबर माह में 62 हजार 500 रुपये की जुर्माने के तहत धनराशि की वसूली हुई।
प्रभारी वनाधिकारी एके शुक्ला ने बताया कि अवैध कटान पर अंकुश पाने के लिए क्षेत्रीय वनाधिकारियों द्वारा समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। यदि कहीं से कोई शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाती है।