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किसानों के हितों की अनदेखी कर रही सरकार

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अंबेडकरनगर कलेक्ट्रेट के निकट नए कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन करते भाकियू कार्यकर्ता। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन कर किसानों के हक की आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि किसान तमाम मुश्किलों से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए किसान आंदोलनरत हैं, लेकिन उनकी आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार किसानों की हितों की अनदेखी कर रही है। किसानों के हित को देखते हुए जल्द कृषि कानून को वापस लिया जाए। बाद में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
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जिलाध्यक्ष भागीरथी यादव ने कहा कि कृषि कानून लाकर केंद्र सरकार किसानों को बंधुआ मजदूर बनाना चाहती है। काले कानून को वापस लेने के लिए किसान आंदोलनरत हैं, लेकिन उनका दर्द सुनने की बजाय उनकी आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली के बॉर्डर पर इस प्रकार किलेबंदी की गई है, जैसे कोई विदेशी ताकत हमला करने वाली है। यदि इसी प्रकार की किलेबंदी चीन बॉर्डर पर की जाती, तो शायद चीनी हमारे देश की सीमा में न घुस पाते। उन्होंने कहा कि किसानों के हित को देखते हुए अविलंब बगैर किसी शर्त कूषि कानूनों को वापस लिया जाए।
वक्ताओं ने कहा कि न सिर्फ अंबेडकरनगर, बल्कि समूचे प्रदेश में खेतों में खड़ी फसलों को छुट्टा जानवर नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे जानवरों से फसलों को बचाने के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। ऐसे जानवरों को पशु आश्रयस्थल पर ले जाने की सुध नहीं है। किसान खाद, बीज के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसान आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं किया जा रहा है।
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चेतावनी दी कि किसानों के हित को लेकर जो संघर्ष छेड़ा गया है, उसे अब अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लिया जाएगा। जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे, तक तब आंदोलन जारी रहेगा। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया। इस मौके पर रामदयाल वर्मा, मनीराम वर्मा, बाबूराम, रामअजोर, रामचरन, रामसजीवन, राजेंद्र, रामचेत, नंदकुमार आदि मौजूद रहे।
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