यहां कार्यक्रम में यात्रा का नेतृत्व कर रहे भगवान जी रैयाणी ने कहा कि अदालतों में लंबे समय से लाखों मुकदमें लंबित पड़े हुए हैं। अधिकांश पीड़ितों को न्याय तब मिलता है, जब या तो वे वृद्ध हो जाते हैं या फिर उनका निधन हो जाता है।
सरलता से न्याय मिलने की बजाए यदि उन्हें कुछ मिलती है, तो वह सिर्फ तारीख है। तारीख पर तारीख को बंद करना चाहिए और जल्द से जल्द न्याय दिलाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ऐसा तब हो सकता है, जब न्यायधीशों की संख्या बढ़ाई जाए और तारीख देने की बजाए, त्वरित फैसला सुनाया जाए। इस दौरान लालबहादुर, जयशंकर, दुर्गविजय, पुनीत गौतम, रमापति आदि मौजूद रहे।