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Ambedkar Nagar News: यहां जान जोखिम में डालकर पढ़ रहीं छात्राएं

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अंबेडकरनगर। अस्तित्व के संकट से संघर्ष कर रहे अकबरपुर नगर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में 146 छात्राएं जान जोखिम में डालकर शिक्षा हासिल कर रही हैं। निष्प्रयोज्य घोषित हो चुके अत्यंत जर्जर 12 शिक्षण कक्षों में छात्राओं को शिक्षा दी जा रही है। आलम यह है कि पढ़ाई के दौरान ही कभी छत का प्लास्टर गिरता है तो कभी दीवार का।
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बालिका शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाला राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बीते लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। मौजूदा समय में उसका अस्तित्व ही खतरे में है। लगभग चार दशक पहले संबंधित विद्यालय में दो से ढाई हजार छात्राएं शिक्षा हासिल करती थीं लेकिन उपेक्षा के चलते लगातार इनकी संख्या कम होती गई। मौजूदा समय में मात्र 146 छात्राएं ही विद्यालय में पंजीकृत हैं।
कॉलेज में 12 शिक्षण कक्ष हैं। सभी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके चलते ही लगभग छह वर्ष पहले ही भवन को निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद भी जान जोखिम में डालकर छात्राएंं शिक्षा हासिल करने को मजबूर हो रही हैं। ज्यादातर कक्षाएं बरामदे में ही संचालित होती हैं। जर्जर कक्षों की हालत यह है कि पढ़ाई के दौरान कभी छत से तो कभी दीवार का प्लास्टर गिरता है। यह संयोग ही है कि अब तक कोई अनहोनी नहीं हुई।
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विद्यालय में कक्षा छह में 10, कक्षा सात में 13, कक्षा आठ में नौ, कक्षा नौ में 14, कक्षा 10 में 38, कक्षा 11 मेें 18 व कक्षा 12 में 44 छात्राएं पंजीकृत हैं। कॉलेज में गृहविज्ञान विषय की शिक्षा दी जा रही है लेकिन लैब की व्यवस्था नहीं है। (संवाद)
किराए पर रह रहीं शिक्षिकाएं
कॉलेज परिसर में ही शिक्षिकाओं के लिए आधा दर्जन आवास हैं लेकिन लंबे समय से देखरेख के अभाव में पूरी तरह से निष्प्रयोज्य हो गए हैं। लगभग खंडहर में तब्दील हो चुके इन भवन में शिक्षिकाएं नहीं रहतीं हैं। शिक्षिकाओं का कहना है कि बीते दिनों ही परिसर में जहरीला जंतु निकल आया था। इसके लिए वन विभाग की टीम को बुलाना पड़ा था। इसके अलावा अक्सर सांप आदि भी निकला करते हैं। इसके चलते शिक्षिकाएं किराए के भवन में रहने को मजबूर हैं।


जर्जर हुए बिजली उपकरण
देखरेख के अभाव में बिजली उपकरण भी पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। ज्यादातर पंखे खराब हैं। इससे छात्राओं को गर्मी में बगैर पंखे की हवा के ही पढ़ने को मजबूर होना पड़ता है। नया जनरेटर लगभग एक दशक पहले कॉलेज को उपलब्ध हुआ था लेकिन देखरेख के अभाव में वह भी पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।

जिम्मेदारों को भेजा गया पत्र
लगभग 150 छात्राओं को 20 शिक्षिकाएं शिक्षा दे रही हैं। जर्जर भवन को लेकर कई बार डीआईओएस कार्यालय को पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। - शांति प्रजापति, प्रधानाचार्या
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