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Ambedkar Nagar News: अंधेरे की जंजीरों से अब तक आजाद नहीं हो पाया घुरौटिया

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आलापुर विकास खंड के मकरही ग्राम सभा के पुरवा घुरौटिया में बिना तार के खड़े बिजली खंभे। संवाद
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अंबेडकरनगर। एक ओर शहरों और गांवों में लोग बिजली कटौती से परेशान हैं, तो दूसरी ओर जिले में एक ऐसा गांव भी है जहां आज तक बिजली पहुंच ही नहीं सकी। डिजिटल इंडिया और हर घर बिजली जैसी योजनाओं के दौर में भी आलापुर विकास खंड का मकरही ग्राम सभा का पुरवा घुरौटिया आजादी के करीब आठ दशक बाद भी अंधेरे में जीने को मजबूर है।
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करीब 200 से अधिक आबादी वाले इस पुरवे में शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। गांव तक न बिजली के तार पहुंचे हैं और न ही घरों में एक भी बल्ब जल पाया है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि 2016 में बिजली विभाग ने ग्रामीणों के घरों में मीटर तो लगा दिए, लेकिन न खंभे लगाए गए और न ही बिजली लाइन बिछाई गई।
मीटर लगने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही गांव रोशनी से जगमगा उठेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टा, बिना बिजली दिए ही विभाग ने उपभोक्ताओं के नाम बिजली का बिल भेज दिया। इससे नाराज ग्रामीणों ने कई महीने तक अधिकारियों के चक्कर लगाए। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो पूरे गांव के लोगों ने अपने-अपने घरों से मीटर उखाड़कर आलापुर विद्युत उपकेंद्र पर जमा कर दिए।
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बाद में गांव में कुछ बिजली के खंभे तो लगाए गए, लेकिन जमीन विवाद के कारण उन पर तार नहीं खींचे जा सके। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से लेकर ऊर्जा मंत्री तक शिकायत की। विभागीय अधिकारियों ने सर्वे भी किया, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका। अब जमीन का विवाद खत्म होने के बावजूद विभाग बजट का अभाव बताकर हाथ खड़े कर रहा है। (संवाद)

मोबाइल चार्ज करने के लिए कई किमी का सफर
डिजिटल युग में मोबाइल लोगों की जरूरत बन चुका है, लेकिन इस गांव के लोगों के लिए मोबाइल चार्ज करना भी बड़ी चुनौती है। ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव या कस्बे जाना पड़ता है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ परिवारों ने छोटा सोलर पैनल खरीद लिया है, जिससे केवल मोबाइल चार्ज हो पाता है। बाकी ग्रामीण आज भी दूसरों पर निर्भर हैं।

कुछ घरों में सोलर, बाकी अब भी अंधेरे में
गांव के कुछ आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों ने सोलर पैनल लगवा लिए हैं, जिससे रात में एक-दो बल्ब जल जाते हैं। लेकिन रोज मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले अधिकांश परिवार इतने महंगे उपकरण खरीदने में सक्षम नहीं हैं। उनके घर आज भी ढिबरी, लालटेन या मोबाइल की टॉर्च के सहारे रोशन होते हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार हर घर बिजली पहुंचाने के अपने वादे को पूरा करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन पुरवा घुरौटिया में रोशनी नहीं पहुंच पा रही है।
बिजली नहीं, इसलिए रोजगार के अवसर भी नहीं
बिजली के अभाव का असर केवल घरेलू जीवन पर ही नहीं, बल्कि रोजगार पर भी पड़ रहा है। गांव में कोई कुटीर उद्योग या छोटा कारोबार शुरू नहीं हो पा रहा है। सिलाई, वेल्डिंग, आटा चक्की, डेयरी या अन्य बिजली आधारित रोजगार यहां संभव नहीं हैं। इससे युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे गांवों और शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है।

पढ़ाई में आ रहा व्यवधान
गांव निवासी शिवकुमार ने बताया कि वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयार कर रहे हैं। बिजली न होने से तैयारी में बाधा उत्पन्न हो रही है। कई बार अधिकारियों से शिकायत के बाद भी गांव में बिजली के तार व खंभे नहीं लगाए जा सके हैं। हर बार अधिकारी आते हैं और सर्वे रिपोर्ट बनाकर वापस लौट जाते हैं।

सोलर लगाने का बजट नहीं
सुमारी देवी ने बताया कि पति की मौत हो चुकी है। बच्चे मजदूरी करते हैं। बिजली न होने से रात में परेशानी उठानी पड़ती है। गांव के कुछ लोगों ने सोलर लगवा लिया है लेकिन उनके पास रुपये नहीं है। ऐेसे में शाम ढलते ही गांव में अंधेरा छा जाता है।
रात में नहीं हो पाती पढ़ाई
राज यादव ने बताया कि वह घर से 10 किमी दूर राम अवध इंटर कॉलेज में कक्षा नौ में पढ़ते हैं। अगले साल बोर्ड की परीक्षा देना है। इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन गांव में बिजली न होने से रात में पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
घुरौटिया गांव में विद्युतीकरण न होने के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। यदि गांव में एक भी बिजली कनेक्शन नहीं है तो सर्वे कराकर गांव में विद्युतीकरण का कार्य कराया जाएगा।
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- एके यादव, अधिशासी अभियंता आलापुर
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