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शिक्षामित्रों को मिलेगा रुका वेतन

Thu, 24 Dec 2015 12:07 AM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
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मालूम हो कि प्रदेश सरकार ने बीते दिनों जिले के विभिन्न परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को स्थाई शिक्षक के तौर पर समायोजित करने का निर्णय लिया था। इसकी प्रक्रिया भी शुरू हुई थी, लेकिन सभी 2123 शिक्षामित्र समायोजित हो पाते कि इससे पहले उच्च न्यायालय ने समायोजन को रद्द कर दिया।
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जिले में तब तक दो बैच मिलाकर 1600 शिक्षामित्रों को अलग अलग विद्यालयों में सहायक अध्यापक के तौर पर तैनात किया जा चुका था। हाईकोर्ट के निर्णय ने शिक्षामित्रों पर वज्रपात सा कर दिया। इसी बीच उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। इससे शिक्षामित्रों में नई उम्मीद का संचार हुआ।

इस मामले में अब सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों को राज्य सरकार ने पूरा वेतन देने का निर्णय ले लिया। खबर मिलते ही शिक्षामित्रों में खुशी की लहर सी दौड़ गई है। बुधवार को अमर उजाला ने ऐसे कई शिक्षामित्रों से वार्ता की, जिनके परिवार की तमाम उम्मीद उन्हें मिलने वाले वेतन पर टिकी थी।
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बसखारी विकास खण्ड क्षेत्र की कोतूपुर निवासिनी शशि तिवारी ने वेतन मिलने के निर्णय को एकदम सही फैसला बताते हुए कहा कि निश्चित तौर पर यह शिक्षामित्रों के लिए नए वर्ष की बड़ी सौगात है। प्राथमिक विद्यालय कोतूपुर में शिक्षामित्र रहीं शशि अब प्राथमिक विद्यालय जमऊपुर में सहायक अध्यापक के तौर पर तैनात हैं।

उनके पति चंद्रभूषण कृषि कार्य करते हैं। चार बेटियों में से एक का विवाह हो चुका है, जबकि तीन अभी अध्यनरत हैं। शशि ने कहा कि एरियर सहित भुगतान मिलने से बेटियों की शिक्षा के साथ ही घर की गाड़ी भी बेहतर ढंग से चलने में इस फैसले से खासी आसानी होगी।

अकबरपुर निवासी कृष्णकुमार द्विवेदी ने राज्य सरकार का इस निर्णय के लिए आभार जताया। शिक्षामित्र संगठन के जिलाध्यक्ष श्री द्विवेदी जलालपुर ब्लाक के रहीमपुर में शिक्षामित्र के तौर पर तैनात रहे, जबकि अब भियांव ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बराहखुर्द में सहायक अध्यापक के तौर पर तैनाती है।

बोले कि परिवार के खर्च की जो जिम्मेदारी उन पर है, वह अब आसानी से निभाई जा सकेगी। उम्मीदों पर जो कुठाराघात हुआ था, उससे सभी शिक्षामित्र अब उबर सकेंगे। भियांव विकास खण्ड अन्तर्गत दारानगर निवासिनी दीपिका त्रिपाठी पूर्व में भियांव ब्लाक के हसनपुर प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र के तौर पर तैनात थीं।

इन दिनों उनकी तैनाती प्राथमिक विद्यालय मरहरा में हैं। उनके पति दीनानाथ कृषि कार्य करते हैं। कहा कि वेतन भुगतान के निर्णय से परिवार का खर्च चलाने में फायदा होगा। दीपिका ने कहा कि शिक्षामित्रों में जो निराशा पनपी थी, अब वे इससे उबर रहे हैं।
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