जलालपुर। धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करने व उसमें शामिल होने का अवसर काफी पुण्य से मिलता है। जीवन में सुख, शांति, समृद्धि चाहिए तो अध्यात्म से जुड़े रहना होगा। मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के बीच खोता चला जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसके जीवन में शांति नहीं मिल रही है। मानसिक तनाव के चलते बूढ़े हों या बच्चे सभी अवसाद ग्रस्त हो रहे हैं। तरह-तरह की बीमारियां असमय उन्हें अपनी चपेट में ले रही हैं। ऐसे में सभी को समय रहते सजग होने के साथ साथ सुधरना होगा।
ये विचार सोमवार को जलालपुर के वेदमाता गायत्री मंदिर में चल रहे चार दिवसीय यज्ञ के तीसरे दिन हरिद्वार से आए मानस मर्मज्ञ कैलाश नारायण तिवारी ने व्यक्त किया। उन्होंने श्रोताओं को गायत्री मंत्र की महिमा की विस्तृत जानकारी दी। कहा कि गायत्री मंत्र सिर्फ अध्यात्म के लिए नहीं है। गायत्री मंत्र वैज्ञानिक तर्कों पर शत प्रतिशत शुद्ध है। नियमित गायत्री मंत्र का उच्चारण करने से आप स्वयं अपने अंदर बदलाव देखेंगे। पूरे ध्यान के साथ यदि नियमित गायत्री मंत्र का स्वर में उच्चारण किया जाए तो यह न सिर्फ बेहद सुकून देने वाला है, बल्कि इससे कई तरह की मुश्किलें भी दूर होती हैं।
कहा कि जब भी गायत्री मंत्र का उच्चारण करें तो आसन की मुद्रा में बैठे। यह मंत्र कहता है कि उस प्राण स्वरूप, दु:खनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्त:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सत्यमार्ग में ले जाने के लिए प्रेरित करे। इस मंत्र के जप से बौद्धिक क्षमता और मेधा शक्ति की क्षमता बढ़ती है। इससे व्यक्ति का तेज बढ़ता है और दु:खों से छूटने का रास्ता मिलता है। यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर चिरंजीलाल, घनश्याम, श्यामजी, बाबूराम, अनिल, विपिन जायसवाल, रिंकू गुप्त आदि आयोजन को सफल बनाने में सहयोग कर रहे हैं।