अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। यहां सर्जरी से जुड़े कई सामान नहीं हैं तो वहीं कई दवाएं भी नदारद हैं। जिला प्रशासन ने मरीजों को राहत दिलाने के लिए अब अस्पताल प्रशासन को सख्त निर्देश दिया है कि दवाओं से लेकर सभी प्रकार के किट की जरूरत की सूचना एक माह पहले दें। जिला प्रशासन ऐसे सभी सामानों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएगा।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। यह अस्पताल यूं तो 200 बेड का संचालित हो रहा है लेकिन यहां सुविधाएं अभी 100 बेड की ही स्वास्थ्य निदेशालय से मिल रही हैं। नतीजा यह है कि यहां आए दिन दवाओं के साथ ही सर्जरी से जुड़े सामानों का टोटा रहता है। एक दिन पहले बृहस्पतिवार को एडीएम डॉ. सदानंद गुप्ता ने दो एसडीएम व तहसीलदार को साथ लेकर जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इसमें कई तरह की खामी सामने आयी थीं।
इस बीच शुक्रवार को मरीजों का हाल जानने टीम जिला अस्पताल पहुंची तो वहां तीमारदारों ने बताया कि ऑपरेशन के लिए सभी तरह के संसाधन यहां उपलब्ध नहीं हैं। उन्हें विकरिल धागा, क्रोमिक धागा, प्रोलीन व मेस जॉली, आरएल बोतल, स्पाइनल सुई, एडीके किट व एनॉबिन इंजेक्शन आदि बाहर से लेना पड़ा। मरीजों ने बताया कि इसके लिए कई बार रिश्तेदारों या परिचितों से पैसा भी उधार मांगना पड़ जाता है।
अलग-अलग ऑपरेशन के अनुसार एक हजार से लेकर 5 हजार तक के सामानों को खरीदना पड़ता है। हड्डी आदि के ऑपरेशन में यह राशि 15 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इसके अलावा गैस, स्किन, सांस आदि के रोग की कई दवाएं भी नहीं हैं।
तीमारदारों ने जताई नाराजगी ताराखुर्द से आए रामप्रकाश यादव ने कहा कि जिला अस्पताल में नि:शुल्क इलाज मिल पाना मुश्किल है। कोई भी ऑपरेशन हो तो हजारों रुपये बाहर से खर्च ही करने पड़ते हैं। जलालपुर से आईं महिला तीमारदार श्वेता तिवारी ने कहा कि ऑपरेशन के नाम पर दो तरह की मुश्किल आती हैं। एक तो दवा से लेकर कई तरह की किट बाहर से लेनी पड़ती हैं दूसरा कर्मचारियों द्वारा भी अवैध ढंग से पैसा मांगा जाता है। महरुआ के विनय पांडेय ने बताया कि उनकी मां यहां भर्ती हैं। लगभग दो हजार रुपये की दवाएं व सामान बाहर से लाना पड़ा है।
दुरुस्त की जा रही व्यवस्था
जिला अस्पताल में सभी तरह की जरूरी जांच व संसाधन मरीजों को मुहैया कराए जाएंगे। बीते दिनों हुए निरीक्षण में जो खामियां मिली हैं उन्हें दुरुस्त कराया जा रहा है। मरीजों को दवा व अन्य उपकरण की कमी नहीं होने पाएगी। - डॉ सदानंद गुप्ता, अपर जिलाधिकारी