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जिले में दम तोड़ रही प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी जनआरोग्य योजना

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अंबेडकरनगर। कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू की गई प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जिले में औंधे मुंह गिरती नजर आ रही है। जिम्मेदारों की बेफिक्री के चलते इस योजना से मरीजों का मोहभंग सा होता जा रहा है। कारण यह कि करीब सवा एक साल से जिले में संचालित इस योजना के तहत अब तक सिर्फ 1744 मरीजों का ही इलाज हो सका है, जबकि डेढ़ लाख से अधिक परिवार इस योजना के तहत पंजीकृत हैं। तीन सौ से ज्यादा मरीजों को दूसरे जिलों में इलाज कराना पड़ा। वहीं, जिले के दो अस्पतालों ने मरीज भर्ती करना ही बंद कर दिया है क्योंकि पेमेंट होेने में दिक्कतें आ रही हैं। दूसरी तरफ योजना में पंजीकृत तीन सीएचसी पर मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यही सब वजहें है जिसके चलते योजना में पलीता लग रहा है।
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गरीब मरीजों को नि:शुल्क इलाज की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी। इसका नाम अब प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कर दिया गया है। इसमें एक परिवार के सभी सदस्यों का प्रत्येक वर्ष पांच लाख रुपये तक के निशुल्क इलाज का प्राविधान है। योजना शुरू हुई तो इसका बड़े पैमाने पर स्वागत हुआ। शहर से लेकर गांव तक ऐसे मरीजों व उनके परिवारीजनों में नई उम्मीद जगी, जो आर्थिक अभाव में समुचित इलाज करा पाने में सक्षम नहीं हैं। यह बात अलग है कि जिले में यह योजना पूरी तरह धराशायी होकर रह गई है। किसी भी जिम्मेदार को इस तरफ देखने तथा पंजीकृत अधिकाधिक मरीजों तक योजना का लाभ पहुंचाने की सुध नहीं है। नतीजा यह कि यह योजना जिले में दम तोड़ती सी दिख रही है।
बताते चलें कि जिले में योजना का शुभारंभ 23 सितंबर 2018 को हुआ था। योजना के तहत 1 लाख 64 हजार 869 परिवारों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। हालांकि इसके सापेक्ष अब तक कुल 1744 मरीजों का ही उपचार जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों में हो पाया है। जिले में पंजीकृत परिवारों में से 334 मरीजों का भी उपचार योजना के तहत हुआ जरूर, लेकिन वह अन्य जनपदों के अस्पतालों में कराया गया। योजना के दम तोडने का एक बड़ा कारण पंजीकृत दो निजी अस्पतालों कनक हास्पिटल तथा रामा हास्पिटल द्वारा इलाज से हाथ पीछे खींच लेना है। इन दोनों अस्पतालों में हुए इलाज का भुगतान लंबित होने की वजह से यहां अब मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। पंजीकृत तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जलालपुर, टांडा व बसखारी में बीते सवा एक वर्ष के भीतर सिर्फ 105 मरीजों का ही उपचार किया जा सका है। दिसंबर माह में सीएचसी जलालपुर में योजना के तहत सिर्फ एक मरीज का उपचार हुआ, तो टांडा व बसखारी में योजना के तहत कोई मरीज भर्ती नहीं किया गया। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में भी दिसंबर माह में सिर्फ 57, तो जिला अस्पताल में पूरे माह के दौरान सिर्फ 90 मरीजों का उपचार योजना के अन्तर्गत हो पाया।
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योजना के तहत मरीजों के इलाज में हीलाहवाली का एक बड़ा कारण इलाज के बाद अस्पतालों को भुगतान मिलने में होने वाला विलंब माना जा रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में कुल 531 मरीजों का इलाज अब तक किया है। उसे इलाज के बाद 26 लाख 46 हजार 399 रुपये का भुगतान होना बाकी है। 22 लाख 20 हजार 125 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जिला अस्पताल में अब तक 1001 मरीजों का इलाज किया गया। यहां भी 24 लाख 66 हजार 216 रुपये का भुगतान लंबित है। हालांकि 40 लाख 32 हजार 450 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सीएचसी जलालपुर में 30 मरीजों के उपचार पर 79 हजार 200 रुपये व्यय हुआ, लेकिन अब तक 68 हजार 400 रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है। सीएचसी टांडा में 32 मरीजों के उपचार के बदले 40 हजार का बकाया है, तो वहीं सीएचसी बसखारी में 43 मरीजों के उपचार व कुछ भुगतान के बाद अभी 16 हजार 200 रुपये का भुगतान होना शेष है। कनक अस्पताल ने 49 मरीजों का उपचार कर 11 लाख 33 हजार 250 रुपये का बिल भेजा, लेकिन साढ़े 7 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ। रामा हास्पिटल में 58 मरीजों का उपचार कर पौने सात लाख रुपये का बिल भेजा गया, जिसमें से साढ़े तीन लाख रुपये का भुगतान नहीं हो पाया। मरीजों व तीमारदारों के अनुसार भुगतान में होने वाली इन्हीं कठिनाइयों के चलते ही अस्पतालों द्वारा योजना के तहत इलाज में रुचि नहीं ली जा रही है।
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