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धांधली पर पर्दा डालने की कोशिश

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अंबेडकरनगर। धांधली छिपाने के लिए अफसरों की मनमानी देखिए। जिले की 927 ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर की खरीद के बाद जब गड़बड़ी का खुलासा हुआ तो अफसर अब आंकड़े छिपाने में लग गए हैं। बताया जा रहा है कि ब्लॉकों से लेकर जिला मुख्यालय तक पर कोई आंकड़ा उपलब्ध ही नहीं है। पता नहीं चल पा रहा है कि कितनी ग्राम पंचायतों में दोनों उपकरण आशा बहुओं को उपलब्ध करा दिए गए हैं। उपकरणों का मूल्य छिपाने का भी प्रयास हर स्तर पर किया जा रहा है। मतलब साफ है कि प्रदेश के कुछ जिलों में उपकरणों की खरीद को लेकर धांधली पकड़ में आ जाने के बाद यहां पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
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आपदा में अवसर तलाशने के बाद अब जब गर्दन फंसती नजर आने लगी है तो पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर की खरीद को लेकर अधिकारी बचते दिख रहे हैं। दरअसल, शासन ने जून माह में ही प्रत्येक ग्राम पंचायत में तैनात आशा बहू को ये दोनों उपकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। ग्राम पंचायत की तरफ से इसके भुगतान का आदेश शासन ने दिया था। खरीद के लिए अफसरों ने तत्परता दिखाई, लेकिन अब खरीद छिपाने का खेल शुरू हो गया है। जिले में अकबरपुर, टांडा, बसखारी, रामनगर, जहांगीरगंज, भियांव, जलालपुर, भीटी व कटेहरी विकासखंड क्षेत्र में इन सामानों की खरीददारी का निर्णय जून माह के अंतिम सप्ताह में लिया गया था।
प्राथमिकता के आधार पर जून में ही खरीददारी कर लेनी थी, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कितनी ग्राम पंचायतों में इन उपकरणों की खरीद कर ली गई। सूत्रों के अनुसार सभी 927 ग्राम पंचायतों के लिए पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेट थर्मामीटर की खरीद कागजों पर तो हो गई है, लेकिन सभी ग्राम पंचायतों में इसकी उपलब्धता नहीं हो पाई है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह कि सभी नौ ब्लॉकों में तैनात एक भी सहायक विकास अधिकारी पंचायत को निर्धारित अवधि के ढाई माह बाद तक यह पता नहीं कि कितने ग्राम पंचायतों में इन उपकरणों की खरीद हुई।
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इन अधिकारियों को यह भी नहीं पता कि निर्धारित दर 28 सौ के सापेक्ष कितने रूपए में ग्राम पंचायतों में दोनों उपकरण खरीदे गए हैं। लगभग सभी ब्लाकों में तैनात अधिकारियों का कहना था कि अभी ऑकड़े उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी तरह का जवाब जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में तैनात अधिकारियों ने भी दिया। बताया कि फिलहाल कोई अधिकृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उधर, ब्लॉकों से लेकर जिला मुख्यालय तक पर कार्यरत अधिकारियों के इस रवैये से यह संदेश साफ निकल रहा है कि या तो उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों की परवाह नहीं है या फिर किसी बड़ी धांधली पर पर्दा डालने के लिए आंकड़ों को छिपा रहे हैं। असलियत दोनों में से चाहे जो भी हो लेकिन मौजूदा स्थिति अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।
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