अकबरपुर के ब्राहमपुर निवासी राघवराम वर्मा ने सीजेएम न्यायालय में बीते दिनों एक परिवाद दायर कर कहा था कि उनके पिता की मौत हो चुकी है और भाइयों के बीच आपसी बंटवारा हो चुका है।
60 वर्षीय राघवराम ने न्यायालय को बताया कि उसके कोई संतान नहीं है। दवा व इलाज के लिए उसने एक भूखण्ड का बैनामा 24 जून 2009 को बैरमपुर बरवां निवासी शकुंतला देवी को कर दिया था। बैनामे के बाद उनके भाई लालता प्रसाद ने भूमि हड़पने के लिए उनकी प्रताड़ना शुरू कर दी। तरह तरह के अनुचित दबाव डालने लगे।
बाद में लालता के पुत्र डा अनिल कुमार वर्मा ने विकास नगर लखनऊ निवासी चिकित्सक डा वाईपी सिंह तथा डा अतुल मिश्र लखीमपुर खीरी को साजिश में शामिल कर उसके नाम से एक फर्जी चिकित्सीय प्रमाणपत्र बना डाला, जिसमें उसकी मानसिक स्थिति ठीक न होने का हवाला दिया गया। इसी आधार पर बैनामा खारिज कराने का प्रयास किया गया। इसकी जानकारी होने के बाद ही उसने कोर्ट में मामला दायर किया।
इसी मामले में गुरुवार को सीजेएम न्यायालय ने चारों आरोपियों को तलब किया था। सीजेएम राजेशनरायणमणि त्रिपाठी ने चारों आरोपियों डा वाइपी सिंह, डा अतुल मिश्र, डा अनिल वर्मा व लालता प्रसाद को न्यायिक अभिरक्षा में लेने के बाद उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। आरोपियों ने इसके बाद जनपद न्यायाधीश डा गोकुलेश के समक्ष जमानत की अर्जी दी, लेकिन उन्होंने भी इसे खारिज कर दी।