मालूम हो कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध ढंग से आरा मशीनों का संचालन किया जा रहा है। इससे राजस्व की चपत भी लग रही है। इन आरामशीनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। इन आरा मशीनों की क्रियाशीलता अधिक होने के चलते हरे पेड़ों की कटान भी तेजी से की जा रही है। तमाम शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय निदेशक सामाजिक वानिकी फैजाबाद मण्डल ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर अवैध ढंग से संचालित हो रहीं आरा मशीनों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया। कहा गया कि सघन अभियान चलाकर न सिर्फ इस प्रकार से संचालित हो रहीं आरा मशीनों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए, बल्कि लोगों को वैध आरा मशीनों में ही लकड़ी चिरवाने को लेकर जागरुक करें।
प्रभारी वनाधिकारी एके शुक्ल ने बताया कि जिले में कुल 67 पंजीकृत आरा मशीनों का संचालन किया जा रहा है। बताया कि बीते दिनों जांच अभियान चलाकर चार अवैध आरा मशीनों के संचालक के विरुद्ध संबंधित थानों में केस दर्ज कराया गया था। इसमें मखदूमनगर में आरा मशीन का संचालन कर रहे वसीर अहमद पुत्र मोहम्मद ईसा निवासी सकरावल, रसूलपुर हरिजन बस्ती के निकट आरा मशीन का संचालन कर रहे फिरोज पुत्र अहमद हसन निवासी सकरावल पूरब, इसी गांव में संचालन कर रहे अफरोज पुत्र दुल्ली निवासी टांडा व नेहरूनगर में आरा मशीन का संचालन कर रहे जावेद पुत्र अली हुसैन निवासी टांडा शामिल हैं। बताया कि छापेमारी के दौरान अवैध ढंग से संचालन कर रहे संचालकों द्वारा विरोध करने पर आरा मशीनों की बरामदगी नहीं की जा सकी थी। इनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश आरा मशीन एवं विनियमन नियमावली 1918 की धारा 3 व भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 77 व 41/42 के अन्तर्गत कोतवाली टांडा में केस दर्ज कराया गया। बताया कि शीघ्र अभियान चलाया जाएगा।