टांडा के बहुचर्चित राममोहन हत्याकांड में पुलिस जांच से बरी किए गए पूर्व सपा विधायक अजीमुलहक पहलवान की मुश्किलें फिर से बढ़ गई हैं। अपर सत्र न्यायाधीश तहसीलदार सिंह ने अजीमुलहक समेत उन सभी चार आरोपियों को मामले में विचारण के लिए 2 अगस्त को तलब कर लिया है।
पूर्व विधायक की नामजदगी के बाद उनकी गिरफ्तारी व कार्रवाई न होने के चलते इस मामले में मौजूदा मुख्यमंत्री आदित्यनाथ भी यहां बतौर सांसद परिवारीजनों की मदद करने पहुंचे थे। गौरतलब है कि टांडा के प्रसिद्ध हिंदू नेता रामबाबू गुप्त की हत्या के बाद उनके भतीजे राममोहन की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
वर्ष 2013 में ही हुई इन दोनों घटनाओं में तत्कालीन सपा विधायक अजीमुलहक पहलवान का नाम प्रमुखता से उछला था। रामबाबू की हत्या में भी परिवारीजनों ने विधायक पर घटना को अंजाम दिलाने का आरोप लगाया था जबकि राममोहन की हत्या के बाद तो सीधे तौर पर नामजद करते हुए केस दर्ज करा दिया था।
सत्तारूढ़ दल के विधायक के विरुद्ध हत्या का केस दर्ज होने के बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर जबरदश्त आंदोलन चला। दोनों मामलों में गोरखपुर के सांसद व मौजूदा मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ ने परिवारीजनों का पूरा साथ दिया और वे विधायक की गिरफ्तारी व कार्रवाई की मांग को लेकर बतौर सांसद यहां पहुंचे भी थे।
राममोहन हत्याकांड में पुलिस ने विधायक समेत सभी नामजद चार आरोपियों के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगाते हुए शातिर बदमाश अबू बकर व अन्य के विरुद्ध साक्ष्य का दावा कर गिरफ्तारी की थी। इस बीच इस मामले के वादी वेदप्रकाश गुप्त ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर नामजद आरोपियों को तलब करने की मांग की।
अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तीन तहसीलदार सिंह ने मामले में सुनवाई करते हुए पूर्व विधायक व आरोपी अजीमुलहक पहलवान, रहमान, शाहिद व इरफान को तलब करने का आदेश जारी कर दिया। चारों आरोपियों को 2 अगस्त को उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।
न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि रामबाबू की हत्या के पूर्व से लेकर हत्या के बाद हो रही पैरवी एवं राममोहन की हत्या तक अजीमुलहक व अन्य द्वारा बार-बार पैरवी न करने एवं जान से मारने की धमकी देने का जिक्र है।
वादी मुकदमा द्वारा समय-समय पर दिए गए प्रार्थना पत्रों एवं पुलिस की कार्रवाई से स्पष्ट है कि आरोपियों के प्रभाव में संबंधित थाने की पुलिस ने निष्पक्ष एवं प्रभावी कदम उठाते हुए आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने लिखा कि यह भी स्पष्ट है कि आरोपी अजीमुलहक पहलवान तत्कालीन सत्तापक्ष के प्रभावशाली विधायक थे।
अजीमुलहक के मोटिव से जुड़े प्रश्न पर आदेश में कहा गया है कि उनकी राजनीतिक पकड़ एवं पुलिस पर दबाव बनाने के संबंध में बराबर समाचार पत्रों में प्रकाशन होता रहा है। अखबारों में छपी खबर की सत्यता को सरसरी तौर से इनकार भी नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रस्तावित आरोपियों को तलब किए जाने का पूरा आधार मौजूद है।