अंबेडकरनगर। खरीफ सीजन में तिल की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) पांती में सोमवार से पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। 24 जुलाई तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में किसानों को तिल की उन्नत खेती और फसल प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रामजीत ने कहा कि तिल कम लागत में अधिक लाभ देने वाली प्रमुख तिलहनी फसल है। यदि किसान उन्नत बीज, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, समय पर बुवाई और समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन अपनाएं तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन–तिलहन के समन्वयक एवं शस्य वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार कनौजिया ने किसानों को तिल की उन्नत प्रजातियां, बीज उपचार, खेत की तैयारी, वैज्ञानिक बुवाई, पोषण प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन, जल प्रबंधन तथा कटाई व भंडारण की तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान अपनी आय में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं। प्रशिक्षण के बाद चयनित किसानों को जी.टी.-7 प्रजाति का उन्नत तिल बीज वितरित किया गया। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए करीब 30 किसानों ने भाग लिया। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को खेतों में अपनाकर तिल की लाभकारी खेती करने की अपील की।