अंबेडकरनगर के इस फायर स्टेशनों पर है संसाधनों व मैनपॉवर का टोटा।
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अग्निशमन केंद्रों में न सिर्फ संसाधनों, बल्कि फायर कर्मियों की कमी है। इस वजह से आग की घटनाएं होने पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती है। आग बुझाने में हर साल यही समस्या सामने आती है, लेकिन इसके निपटारे के लिए कोई प्रयास नहीं किए जाते हैं।
यही वजह है कि अग्निशमन अधिकारी, फायरमैन से लेकर चालक तक के 55 पद खाली चल रहे हैं। आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सभी थाना कार्यालय परिसर में दमकल के कम से कम छोटे वाहनों की मौजूदगी तय करने के लिए लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
आग की लगातार बढ़ती घटनाओं के बाद भी संसाधनों में वृद्घि करने की परवाह प्रशासन को नहीं है। फिलहाल तहसील मुख्यालयों तक में ही कोई मुकम्मल व्यवस्था तय नहीं हो पा रही है। जलालपुर तहसील मुख्यालय पर भवन बनकर तैयार है, लेकिन हैंडओवर न होने की वजह से थाना परिसर से ही इसका संचालन हो रहा है।
भीटी में तो भवन ही नहीं है। ऐसे में अकबरपुर से तहसील क्षेत्र के गांवों में आग लगने पर वाहन भेजे जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में खेतों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में जरूरत जिले के सभी थाना परिसर में आग पर काबू पाने के लिए वाहन व टीम के मौजूद रहने की है।
स्टाफ व संसाधनों की कमी आग से होने वाले नुकसान को कम करने में आड़े आ रही है। कई बार ऐसा होता है कि एक बार में कई जगहों से आग लगने की सूचना आ जाती है।
ऐसे में जिस स्थान पर टीम देर से पहुंचती हैं, वहां उन्हें अक्सर ग्रामीणों का कोपभाजन होना पड़ता है। एक दिन पहले ही हासिमपुर बरसावां में तीन फायरकर्मियों की पिटाई इसका ताजा उदाहरण है।