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संतान की दीर्घायु के लिए रविवार को महिलाएं रखेंगी व्रत

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आलापुर। रविवार को गणेश चतुर्थी का पर्व है। इसे संकटा चतुर्थी या तिलकुट चतुर्थी आदि नामों से भी जानते हैं। इस चतुर्थी को माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए भगवान गणेश की उपासना करती हैं। चंद्रोदय का समय रात्रि 8 बजकर 20 मिनट पर होगा। इस समय चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करने का शुभ मुहूर्त है। इस दिन महिलाएं पूरी श्रद्घा भक्ति के साथ व्रत को रखती हैं, और पूरे विधि विधान से भगवान गणेश की आराधना करती हैं। ऐसा करने से संतान के दुखों का समूल नाश होता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में महिलाएं सोमवार को व्रत रखकर पूजन अर्चन करेंगी। इसे लेकर महिलाओं ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी है।
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यह जानकारी सनातन वैदिक आश्रम देवभूमि नयागांव के आचार्य आशुतोष शुक्ल ने दी। बताया कि एक बार मां पार्वती स्नान के लिए गईं और द्वार पर गणेशजी को नियुक्त कर दिया कि कोई अंदर न आने पाए। मां की आज्ञा मानकर गणेशजी पहरा देने लगे। उसी समय भगवान भोलेनाथ आ गए और जैसे ही अंदर जाना चाहे तो गणेशजी ने उन्हें रोक दिया। भगवान शिव क्रोधित हो गए, और अपने त्रिशूल चला दिया।
उनके त्रिशूल से गणेशजी का गर्दन कट गया। ठीक उसी समय पार्वती जी आ गई और वह दृश्य देखकर अत्यंत दुखी हो गईं और रुदन करने लगीं। उनके रुदन को देखकर शिव जी ने हाथी के सिर को मंगा करके गणेश जी के धड़ पर उसे लगा दिया। गणेशजी को पुन: जीवित कर दिया। साथ में भगवान गणेश को अनंत शक्ति प्रदान की, और त्रिभुवन में सर्व प्रथम पूज्य होने का गौरव प्रदान किया। इस पर मां पार्वती भगवान भोलेनाथ पर अत्यंत प्रसन्न हुईं।
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इसी दिन भगवान गणेश बहुत बड़े संकट से बाहर आए थे । इसीलिए इस चतुर्थी को गणेश संकट चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश का पूजन कर गणेश प्रतिमा में हल्दी का लेप लगाकर पीला वस्त्र धारण कराने की परंपरा है। भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय तिल, गुड़, मिश्रित लड्डू का भोग लगाएं। गणेश आरती के माध्यम से भगवान की विधिवत आरती करें।
ऐसा करने से जीवन में आने वाले समस्त संकटों से छुटकारा मिलता है और संतान के उज्ज्वल भविष्य को एक नई दिशा प्राप्त होती है। संतान के जीवन में आने वाले समस्त संकटों का शमन हो जाता है। रविवार को पड़ रहे गणेश चतुर्थी को लेकर महिलाओं में खासा उल्लास भी है। महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ व्रत को रखेंगी और परंपरा का निर्वहन करेंगी। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में महिलाएं सोमवार को व्रत रखकर पूजन-अर्चन करेंगी।
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